जमीन में गढ़े खजाने की कहानियां आपने कई बार सुनी होंगीं. कई खुशकिस्मत लोगों को ऐसा खजाना अपनी जमीन पर मिलता है और वो मालामाल हो जाते हैं. कहानियों में आपने कई बार ऐसा देखा या पढ़ा होगा. अब उत्तर प्रदेश के उन्नाव में राधा कृष्ण अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति मिली है, जो किसी खजाने से कम नहीं है. यहां के मिर्जापुर कलां गांव में एक शख्स को जमीन में खुदाई के दौरान ये मूर्ति मिली, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में खबर फैल गई.

जमीन से नीचे से क्या मिला?

उन्नाव में एक शख्स जब अपने खेत पर रेस्टोरेंट बनवाने का काम करवा रहे थे, तभी एक पेड़ की जड़ को उखाड़ते हुए मटके से फावड़ा टकराया और फिर उसे बाहर निकाला गया. जमीन के नीचे से एक पानी भरा घड़ा, उसके साथ रखी अष्टधातु की मूर्ति, सांप और संस्कृत में लिखा एक भोजपत्र मिला. इस खजाने के मिलने की खबर आग की तरह फैली और मौके पर कई लोग जमा हो गए. कुछ लोगों ने मूर्ति की पूजा भी शुरू कर दी. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मूर्ति को अपने कब्जे में लिया, साथ ही इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को भी दी गई. 

क्या कहता है कानून?

अब अगर आप भी यही सोचते हैं कि काश किसी दिन जमीन में दबा हुआ खजाना मिल जाए तो ये जानकारी आपके लिए जरूरी है. जमीन में दबे खजाने पर किसी का भी अधिकार नहीं होता है. इस पर सरकार का अधिकार होता है. इसीलिए अगर आपको अपनी जमीन में दबा कोई खजाना मिल भी जाता है तो इसे आप नहीं रख सकते हैं. इसकी जानकारी पुलिस या सरकार को देना जरूरी होता है. संविधान के अनुच्छेद 297 के मुताबिक भारत के किसी भी क्षेत्र, जमीन, या कहीं और मिलने वाले हर तरह के खनिज पर सरकार का ही अधिकार होगा. 

कहां जाता है खजाना?

अगर जमीन से कोई प्राचीन चीज मिलती है तो इसे पुरातत्व विभाग के पास रिसर्च के लिए भेजा जाता है. बाकी सोना या फिर अन्य तरह का खजाना मिलने पर पुलिस तुरंत उसे जब्त कर लेती है और फिर सरकारी ट्रेजरी में जमा करा दिया जाता है. यानी भले ही आपकी जमीन से करोड़ों का खजाना निकल जाए, लेकिन इस खजाने को आखिरकार सरकारी खजाने में ही जमा कराना होगा. 

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