कैसे पहुंचीं दादी मुर्दाघर के अंदर?

के मुताबिक, कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित बॉयल हाइट्स इलाके में मारिया को हार्ट अटैक आया था. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद मारिया को बॉडी बैग में बंद किया गया. मुर्दाघर के रेफ्रिजरेटेड फ्रीजर में रख दिया गया और सभी ने मान लिया कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कुछ देर बाद चमत्कार हुआ. मारिया की आंखें खुल गईं. वह जिंदा थीं और फ्रीजर में बंद थीं.

बाहर निकलने की कोशिशें और जमा देने वाली मौत

पैथोलॉजिस्ट डॉ. विलियम मैनियन के अनुसार, 80 साल की मारिया डी जीसस अरोयो की जब चेतना लौटी, तो उन्होंने अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन फ्रीजर की जमा देने वाली ठंड के कारण उनका शरीर अकड़ गया, चेहरे पर चोटें आईं, नाखून और त्वचा पर संघर्ष के निशान मिले और आखिर में ठंड से उनकी मौत हो गई.

जब अंतिम संस्कार गृह के कर्मचारी बॉडी लेने पहुंचे, तो वे दंग रह गए. बॉडी बैग आधा खुला था. मारिया मुंह के बल पड़ी थीं और उनके चेहरे पर संघर्ष के गहरे निशान थे, तभी यह शक गहराया कि उन्हें गलती से जीवित रहते ही फ्रीजर में रख दिया गया था.

परिवार ने तुरंत अस्पताल पर लापरवाही का मुकदमा दायर किया. उनका कहना था, ‘हमारी मां की मौत दिल के दौरे से नहीं, ठंड से हुई है. उन्हें जिंदा रहते हुए फ्रीजर में डाल दिया गया था.’ डॉ. मैनियन की रिपोर्ट ने परिवार के दावे को मजबूत किया. उन्होंने कहा, ‘महिला की कई चोटें ऐसी थीं, जो जागने पर संघर्ष के दौरान लगी होंगी.पहले अदालत ने केस यह कहकर बंद कर दिया कि समय सीमा निकल चुकी है, लेकिन अब, कैलिफोर्निया के दूसरे जिला अपील न्यायालय ने मामले को फिर से खोल दिया है. अदालत ने कहा, ‘परिवार को यह पता करने का कोई तरीका नहीं था कि महिला जिंदा थी, इसलिए केस दोबारा सुना जाएगा.’ इस फैसले ने परिवार को फिर से उम्मीद दी है कि उन्हें न्याय मिलेगा.

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