मां की ममता का कोई मोल नहीं, यह वाक्य रविवार को ठीबगांव निवासी ज्योति यादव ने साबित कर दिया। ज्योति ने अपनी डूबती बेटी की संासेंंं बचाने के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। ज्योति अपने पति पुरूषोत्तम यादव और दो वर्ष की बेटी दर्शिका के साथ बाइक से करोंदिया गांव में हुए पगड़ी कार्यक्रम से लौट रही थीं। रामपुरा और ठीबगांव के बीच इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर के पास अचानक बाइक का संतुलन बिगड़ा और तीनों नहर में गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ज्योति पानी के किनारे तक आ गई थीं, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी नन्ही बेटी को गहरे पानी में संघर्ष करते देखा, वे बिना एक पल गंवाए नहर में कूद पड़ी। उफनते पानी का बहाव तेज था पर मां की ममता उससे भ्ज्ञी तेज निकली। ज्योति को तैरना भी नहीं आता था उसने तेज बहाव में बच्ची को थामकर ऊपर की ओर धकेला, जिससे पास मौजूद लोग बच्ची को बाहर निकाल सके। हादसे में मासूम दर्शिका बच गई, लेकिन वहां मौजूद लोग ज्योति को नहीं बचा सके।

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