हिंदू धर्म में जिस सकट चौथ को रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश और सकट माता की कृपा बरसाने वाला माना जाता है, वह पावन पर्व 06 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा. महिलाएं इस पावन व्रत को हर साल माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को संतान को लंबी आयु और सुख-सौभाग्य की कामना लिए हुए रखती हैं. सनातन परंपरा में इस पावन व्रत का पुण्यफल पाने के लिए कुछेक नियम बताए गये हैं. सभी विघ्न और बाधाओं को दूर करके शुभ-लाभ बढ़ाने वाले भगवान श्री गणेश और सकट माता को प्रसन्न करने के लिए सकट चौथ व्रत में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
सकट चौथ व्रत में क्या करें
- सकट चौथ व्रत का पुण्यफल पाने के लिए सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करने का प्रयास करना चाहिए.
- सकट चौथ पर गणपति को ईशान कोण में पवित्रता के साथ विराजित करके उनकी पूजा विधि-विधान से करना चाहए.
- सकट चौथ व्रत की पूजा लाल रंग के वस्त्र पहनकर लाल रंग के उनी आसन पर बैठकर करना चाहिए.
- गणपति की पूजा करते समय साधक का मुंह पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
- गणपति की पूजा में पीले या लाल रंग के वस्त्र एवं आसन का प्रयोग करें.
- सकट चौथ की पूजा करते समय गणपति को उनकी प्रिय चीजें जैसे दूर्वा, गन्ना, तिल का लड्डू, मोतीचूर का लड्डू, मोदक आदि जरूर अर्पित् करना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत की पूजा में गणपति पूजा के बाद उनके मंत्र का जाप, स्तोत्र का पाठ और आरती करना चाहिए.
सकट चौथ व्रत में क्या न करें
- सकट चौथ व्रत को रखने वाले व्यक्ति को क्रोध करने और झूठ बोलने या फिर किसी की आलोचना आदि करने से बचना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत वाले दिन साधक को भूल से भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत वाले दिन साधक को दिन में भूलकर भी नहीं सोना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत वाले दिन तन और मन से पवित्र रहते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत की पूजा में भूलकर भी गणपति को तुलसी दल नहीं अर्पित करना चाहिए.
- सकट चौथ व्रत वाले दिन भगवान गणेश की सवारी माने जाने वाले चूहों को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए.
- भगवान गणेश जी को भूलकर भी टूटे हुए अक्षत, बासी फूल, केतकी का फूल, तुलसी दल आदि नहीं चढ़ाना चाहिए.
(यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. )














