बिजनेस डेस्कः अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किए जाने के बाद वैश्विक तेल बाजार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका अब दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस दक्षिण अमेरिकी देश पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल इकॉनमी में उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेज़ुएला में हो रहे घटनाक्रम का भारत की तेल सप्लाई या कीमतों पर फिलहाल कोई तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा लेकिन अगर अमेरिका वहां अपनी मौजूदगी मजबूत करता है, तो यह भारत के लिए भविष्य में तेल आपूर्ति के नए विकल्प खोल सकता है।
भारत पर अभी असर नहीं
अमेरिका की ओर से वेनेज़ुएला पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते पहले ही वैश्विक बाजार में उसके तेल की उपलब्धता सीमित है। वर्ष 2024 में भारत के लिए वेनेज़ुएला कच्चे तेल का 18वां सबसे बड़ा सप्लायर था, जबकि अप्रैल से अक्टूबर के बीच यह फिसलकर 21वें स्थान पर पहुंच गया। इस अवधि में भारत ने वेनेज़ुएला से 300 मिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक मूल्य का तेल आयात किया।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत की तेल आपूर्ति पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं दिख रहा है। एक अधिकारी ने कहा, “अभी स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए दूरगामी आकलन करना जल्दबाजी होगी। फिलहाल हमारी सप्लाई सुरक्षित है।”
एक्सपर्ट्स की राय
थिंक टैंक GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि वेनेज़ुएला संकट का भारत की अर्थव्यवस्था या क्रूड सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। उन्होंने बताया कि 2000 और 2010 के दशक में भारत वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का बड़ा खरीदार था और ONGC Videsh जैसी कंपनियों की ओरिनोको बेल्ट में हिस्सेदारी भी थी लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच तेल व्यापार काफी घट गया।
वहीं IDFC फर्स्ट बैंक की चीफ इकनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता का कहना है कि भले ही वेनेज़ुएला का तेल अभी वैश्विक सप्लाई से बाहर है लेकिन इसका बाजारों पर भावनात्मक असर पड़ सकता है। इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल खुदरा ईंधन महंगाई पर कोई असर नहीं दिख रहा।
वेनेज़ुएला का उत्पादन और तेल बाजार
ICRA रेटिंग्स के सीनियर वीपी प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, अल्पकाल में इस संकट का तेल बाजार पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी सिर्फ 1 प्रतिशत है। एनर्जी इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच उसके तेल उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। oilprice.com के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 0.30 फीसदी गिरकर 60.57 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
जेपी मॉर्गन की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2027 तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं, क्योंकि वैश्विक सप्लाई डिमांड से कहीं ज्यादा हो सकती है।
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में कीमतों में गिरावट से देश को बड़ा फायदा हो सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले साल आम चुनाव से पहले 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी।














