उज्जैन – महाकाल की नगरी उज्जैन मे पांच दिवसीय 14 से 18 जनवरी तक महाकाल महोत्सव होने वाला है. उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को यह पांच दिन ऐसा नज़ारा देखने को मिलेगा, जिसकी चर्चा 12 ज्योर्तिलिंग क्षेत्र में सुनाई देगी. जानें पूरा प्लान
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में हर पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इसी कड़ी में महाकाल लोक में 14 से 18 जनवरी तक भव्य ‘श्री महाकाल महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा. यह आयोजन कोई आम नहीं, बल्कि सोमनाथ महोत्सव की तर्ज पर आयोजित होने वाला है. इस पांच दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. महोत्सव में भाग लेने के लिए देश के सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित विभिन्न ज्योतिर्लिंग मंदिरों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया है.
प्रथम दिन महाकाल महालोक में शिवोहम
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया, पांच दिवसीय श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे. यह आयोजन शिव भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण का भव्य मंच बनेगा. 14 जनवरी से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत होगी. महोत्सव के पहले दिन 14 जनवरी को प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम के साथ शाम 7 बजे श्री महाकाल महालोक में “शिवोहम” की विशेष प्रस्तुति देंगे. दोनों पुत्र भी पार्श्व गायक हैं और इस संगीतमय संध्या को और खास बनाएंगे.
दूसरे, तीसरे और चौथे दिन ये खास
इस महोत्सव को खास बनाने के लिए 15 जनवरी को मुंबई की प्रसिद्ध टीम द ग्रेट इंडियन क्वायर द्वारा शिव संगीतिक प्रस्तुति दी जाएगी. वहीं, 16 जनवरी को जानी-मानी पार्श्व गायिका सोना महापात्रा शाम 7 बजे श्री महाकाल लोक में प्रस्तुति देंगी. 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयस शुक्ला एवं बैंड तथा मुंबई के विपिन अनेजा एवं बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी. 18 जनवरी को महोत्सव का समापन इंडोनेशिया के कोकोरदा पुत्रा और श्रीलंका के अरियारन्ने कालूराच्ची द्वारा प्रस्तुत शिव-केंद्रित नृत्य नाट्य से होगा.
जनजातीय नृत्य का भी दिखेगा नजारा
महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति भी मंच पर जीवंत होगी. 14 जनवरी को छिंदवाड़ा से भारिया जनजातीय भडम नृत्य, बैतूल से गोंड जनजातीय ठाट्या नृत्य, हरदा से काठी नृत्य, धार से भील जनजातीय भगोरिया नृत्य तथा उज्जैन से कला माच शिव बारात (माच शैली) की प्रस्तुति होगी. 15 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसका विषय होगा “शिव तत्व और महाकाल : इतिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में”. इसी दिन डिंडोरी जिले के गोंड जनजातीय गुडूमबाजा, बेगा जनजातीय करमा नृत्य, सागर से बरेदी नृत्य और धार से भील जनजातीय भगोरिया नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी.
ज्योतिर्लिंग प्रमुख, राज्यों के मुख्यमंत्री आमंत्रित
वीर भारत न्यास के सचिव श्री राम तिवारी ने बताया कि यह आयोजन सोमनाथ महोत्सव की तर्ज पर किया जा रहा है. जहां-जहां ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, उन सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है. इस आयोजन का उद्देश्य शिव भक्तों को एक सूत्र में बांधना और सनातन परंपरा का संरक्षण व संवर्धन करना है.














