कांकेर- कांकेर जिले के पीढ़ापाल क्षेत्र में शनिवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान करीब 50 से अधिक परिवारों ने सामूहिक रूप से सनातन धर्म में वापसी की। इसमें पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुलगांव के ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने पारंपरिक पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के माध्यम से अपने मूल धर्म को पुनः स्वीकार किया।
कार्यक्रम के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और सामाजिक सहभागिता ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। स्थानीय हिंदू समाज ने लौटे परिवारों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया, महिलाओं ने आरती उतारी और बच्चों की मौजूदगी ने आयोजन को सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया।
जानकारी के अनुसार, इन परिवारों ने यह निर्णय किसी बाहरी दबाव के बिना लिया। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने पारंपरिक त्योहारों, सामाजिक रीतियों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ाव महसूस कर रहे थे। इसी भावनात्मक जुड़ाव ने उन्हें मूल धर्म की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।
पीढ़ापाल गांव में सुबह से ही आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। गांव में साफ-सफाई, पूजा सामग्री और सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई थी, ताकि लौटे परिवारों को सम्मान और अपनापन महसूस हो सके।
इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों में भी चर्चा रही। जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजन सामाजिक जुड़ाव और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती देते हैं। समुदाय के भीतर संवाद और सहभागिता से सामाजिक संतुलन कायम होता है।
सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने मीडिया को बताया कि यह समाज की एकजुटता का परिणाम है. उन्होंने कहा, “आज 50 परिवारों के 200 से अधिक लोग वापस आ गए हैं. क्षेत्र में अभी 3 से 4 परिवार और शेष हैं, जिन्होंने भी वापसी की इच्छा जताई है और वे जल्द ही मूल धर्म में लौट आएंगे.”
इतने बड़े पैमाने पर हुई इस घर वापसी को लेकर पूरे बस्तर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. इस संवदेनशील विषय को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल, क्षेत्र में शांति का माहौल है और समाज के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.














