हाल ही में यूरोपियन जर्नल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी ने इस समस्या की गंभीरता को और साफ कर दिया है. इस शोध के अनुसार, ग्रामीण भारत में 62.5 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से पीड़ित पाई गईं.

यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बनाती है और जब तक इसके लक्षण साफ दिखाई देते हैं, तब तक शरीर काफी नुकसान झेल चुका होता है. यही वजह है कि एनीमिया को साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है. हालात इतने गंभीर हैं कि भारत की आधी से ज्यादा महिलाएं किसी न किसी स्तर पर एनीमिया से प्रभावित पाई गई हैं.

हाल ही में यूरोपियन जर्नल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी ने इस समस्या की गंभीरता को और साफ कर दिया है. इस शोध के अनुसार, ग्रामीण भारत में 62.5 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से पीड़ित पाई गईं. इनमें से करीब 40 प्रतिशत को हल्का, 18 प्रतिशत को मध्यम और 4.5 प्रतिशत को गंभीर एनीमिया था. यह आंकड़े साफ बताते हैं कि यह समस्या सिर्फ गर्भवती महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि किशोरियों और युवा महिलाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है.

एनीमिया क्या है और क्यों होता है?

एनीमिया तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है. हीमोग्लोबिन का काम शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाना होता है. जब इसकी कमी होती है, तो अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है.

भारत में एनीमिया के मुख्य कारण हैं:

  • आयरन की कमी
  • फोलिक एसिड और विटामिन B12 की कमी
  • बार-बार गर्भधारण
  • बहुत ज्यादा पीरियड्स
  • बैलेंस डाइट की कमी

महिलाओं में एनीमिया इतना आम क्यों?

महिलाओं में एनीमिया ज्यादा होने के पीछे कई सामाजिक और जैविक कारण हैं. मासिक धर्म के दौरान खून की हानि, गर्भावस्था और स्तनपान के समय पोषक तत्वों की बढ़ी हुई जरूरत और घर में सबसे आखिर में खाने की आदत ये सभी कारण महिलाओं को एनीमिया के ज्यादा खतरे में डालते हैं. किशोरावस्था में भी शरीर तेजी से बढ़ता है, लेकिन पोषण की कमी के कारण खून नहीं बन पाता.

एनीमिया के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें:

एनीमिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं. शुरुआत में इन्हें लोग आम थकान समझकर टाल देते हैं.

शुरुआती लक्षण

  • बिना मेहनत के जल्दी थक जाना
  • चक्कर आना या सिर हल्का लगना
  • चेहरे, होंठों और पलकों का पीला पड़ना
  • सांस फूलना
  • हाथ-पैर ठंडे रहना
  • दिल की धड़कन तेज होना

एनीमिया के गंभीर लक्षण

  • सीने में दर्द.
  • लगातार सिरदर्द.
  • बालों का झड़ना.
  • नाखूनों का कमजोर होना.
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी.

अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.

किशोरियों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक?

स्टडी के अनुसार, ग्रामीण इलाकों की किशोरियों में एनीमिया की दर बेहद ज्यादा है. इस उम्र में एनीमिया होने से फिजिकल ग्रोथ रुक सकती है. पढ़ाई और एकाग्रता पर असर पड़ता है. भविष्य में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ता है. यानी एनीमिया सिर्फ आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की सेहत को भी प्रभावित करता है.

एनीमिया की जांच कैसे करें?

एनीमिया की पहचान का सबसे आसान तरीका है हीमोग्लोबिन टेस्ट. यह एक साधारण ब्लड टेस्ट होता है. महिलाओं में सामान्य हीमोग्लोबिन 12 ग्राम/डेसीलीटर या उससे अधिक होना चाहिए.

बचाव और समाधान क्या है?

एनीमिया से बचाव मुश्किल नहीं, अगर समय रहते ध्यान दिया जाए:

  • हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चुकंदर, गुड़ और अनार खाएं.
  • आयरन के साथ विटामिन C लें, जिससे अवशोषण बेहतर हो.
  • डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट लें.
  • रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं.

एनीमिया भारत की महिलाओं के लिए एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली समस्या है. शुरुआती लक्षणों को पहचानकर, सही खान-पान और समय पर जांच से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.
 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930