उत्तर प्रदेश के संभल में सीजेएम के तबादले को लेकर वकीलों में आक्रोश देखने को मिल रहा है. इसे लेकर मुरादाबाद दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के हॉल में बृहस्पतिवार की दोपहर जनरल हाउस में संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले का अधिवक्ताओं ने व्यापक विरोध किया. वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकरण से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को गहरा आघात पहुंचा है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायिक आदेश की अवहेलना वाले बयान देने वाले अधिकारी के विरुद्ध हाईकोर्ट से स्वतः अवमानना की कार्यवाही की अपेक्षा जताई.
जनरल हाउस की सभा की अध्यक्षता बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने की. सभा में अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस पर एफआईआर का न्यायिक आदेश पारित करने के बाद सीजेएम का स्थानांतरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. यह घटनाक्रम न केवल न्यायिक स्वतंत्रता बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता, गरिमा और संस्थागत आत्मसम्मान के लिहाज से भी अत्यंत चिंताजनक है.
न्यायपालिका की निर्भीकता प्रभावित होगी
बार एसोसिएशन एवं लाइब्रेरी का स्पष्ट मत है कि यदि किसी न्यायिक अधिकारी द्वारा अपने न्यायिक विवेक से पारित वैधानिक आदेशों के बाद इस प्रकार के प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं तो इससे न्यायपालिका की निर्भीकता प्रभावित होती है. साथ ही आम नागरिकों के मन में यह धारणा बनती है कि न्यायिक स्वतंत्रता पर दबाव डाला जा रहा है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजा ज्ञापन
जनरल हाउस में सभी ने कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश को इस प्रस्ताव से अवगत कराया जाएगा. जनपद न्यायाधीश मुरादाबाद के माध्यम से इस संबंध में उन्हें ज्ञापन भेजा जाएगा. सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि इस संबंध में कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता है तो अग्रिम कदम के लिए पुनः विचार किया जाएगा.
यहां बता दें कि दो दिन पहले हाईकोर्ट ने संभल के सीजेएम विभांशु समेत 14 जजों का तबादला कर दिया था. इसमें विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर भेज दिया गया.














