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‘कार्तिक-माहात्म्य’ के अनुसार इस पूरे मास की महती महिमा है ही, केवल कार्तिकी पूर्णिमा की भी कम महत्ता नहीं. पुराणों के अनुसार, इसी दिन, यानी कार्तिक पूर्णिमा को भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर का संहार किया था. इसी दिन परस्पर शापवश ग्राह एवं गज बने जय और विजय नामक विष्णु-पार्षदों का उद्धार हुआ था. भगवती तुलसी इसी दिन वनस्पति रूप में पृथ्वी पर प्रकट हुई थीं.

ऐसे कई पौराणिक आख्यान हैं, जो कार्तिक पूर्णिमा की बड़ाई गाते थकते नहीं हैं. इस बार कार्तिक पूर्णिमा 29 एवं 30 नवंबर (रविवार तथा सोमवार) को है. रविवार को दिन में 12.30 के बाद से तथा सोमवार को दिन में 2.25 तक है, इसलिए जो सायंकालीन पूर्णिमा के कृत्य हैं, वे रविवार को और जो प्रातःकालीन हैं, वे सोमवार को होंगे. पहला दिन (रविवार) व्रत के लिए उपयोगी है तो दूसरा दिन (सोमवार) स्नान-दान के लिए विशिष्ट है.

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