बेंगलुरु: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में दावोस गए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वैश्विक मंच पर बेंगलुरु की तगड़ी तारीफ की। डीके कुमार ने विदेशी निवेशकों के सामने बेंगलुरु को ‘द सिटी ऑफ द फ्यूचर (भविष्य का शहर।)’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु सिर्फ एक शहर से कहीं ज़्यादा है। यह टैलेंट और मौकों का पावरहाउस है। डीके शिवकुमार के वर्ल्ड लेवल पर शोकेस करने को उनकी विशेष रणनीति का हिस्सा मान जा रहा है। वे बतौर डिप्टी सीएम जहां बेंगलुरु में ज्यादा कंपनियों के आने की उम्मीद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु को वर्ल्ड लेवल पर उठाकर राजनीतिक दांव भी खेल दिया है।


डीके ने की तगड़ी तारीफ

भारत और एशिया के बड़े आईटी बेंगलुरु को टेक्नोलॉजी और नॉलेज कैपिटल के तौर पर जाना जाता है। डीके शिवकुमार ने दावोस में बेंगलुरु को ग्लोबल पार्टनर्स के साथ समावेशी विकास के लिए आगे बढ़ने का वादा किया। उन्हें ने बेंगलुारु में दिलचस्पी दिखाने और निवेश के भी आमंत्रित किया। डीके शिवकुमार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के साथ राज्य प्रदेश कांग्रेस समिति के चीफ भी हैं। उनके ऊपर सामने आने वाले बेंगलुरु नगर निगम चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने का भी दबाव है। ऐसे में डीके दावोस में एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की। गौरतलब हो कि पिछले कुछ समय से कुछ कॉरपोरेट और दिग्गजों ने बेंगलुरु की समस्याओं को मुखर होकर उठाया है। इसमें ट्रैफिक और टूटी सड़कें शामिल हैं।

10 साल बाद होंगे चुनाव
मुंबई में साढ़े आठ बाद चुनाव हुए तो वहीं बेंगलुरु में अब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद नगर निगम चुनाव होंगे। अंतिम चुनाव 2015 में हुए थे। तब बीजेपी ने 100 सीटें जीती थीें। कांग्रेस को 76 सीटें सीटें मिली थीं। बेंगलुरु के निवार्चित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2020 में पूरा हो गया था। ऐसे में पिछले पांच साल से नगर निगम का कामकाज प्रशासक के आधीन है। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने 25 मई के बाद चुनाव कराने का ऐलान किया है। बेंगलुरु में बैलेट पेपर से चुनाव होगा। तब डीके शिवकुमार ने चतुराई से बेंगलुरु को दावोस में मजबूत से शोकेस करके निवेश को आर्कषित करने की कोशिश की।

10 साल में बदल गई है बेंगलुरु की स्थिति
बेंगलुरु में अभी कोई भी निर्वाचित पार्षद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 30 जून, 2026 तक चुनाव कराने को कहा है। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने पिछले सात सितंबर में बेंगलुरु के स्थानीय प्रशासन में बड़ा बदलाव किया था। बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के 18 साल पुराने स्वरूप को समाप्त कर अब इसे एक नई त्रि-स्तरीय व्यवस्था में बदल दिया गया है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) एक यह एक एपेक्स बॉडी है, जो पूरे शहर के नियोजन और विकास की निगरानी करता है।

अब हो गए हैं 369 वार्ड
मुख्यमंत्री जीबीए के अध्यक्ष और बेंगलुरु के प्रभारी मंत्री खुद डी के शिवकुमार) इसके उपाध्यक्ष हैं। BBMP को विभाजित कर पांच अलग-अलग नगर निगम बनाए गए हैं। इनमें बेंगलुरु सेंट्रल, बेंगलुरु ईस्ट, बेंगलुरु वेस्ट, बेंगलुरु नॉर्थ, बेंगलुरु साउथ शामिल हैं। प्रत्येक की अगुवाई एक कमिश्नर के पास है।नई व्यवस्था के तहत कुल वार्डों की संख्या बढ़ाकर लगभग 369 कर दी गई है। चुनावों में कर्नाटक सरकार के कामकाज के साथ इस व्यवस्था को लेकर लोगों की मत का भी फैसला होगा।

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