नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देश के युवाओं और उद्योग जगत से गुणवत्ता को अपना मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “होता है, चलता है” का युग अब समाप्त हो चुका है और भारतीय उत्पादों की पहचान दुनिया में ‘टॉप क्वालिटी’ के रूप में होनी चाहिए। वर्ष 2026 के अपने पहले ‘मन की बात’ की 130वीं कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम, जल संरक्षण और उभरते हुए ‘भजन क्लबिंग’ जैसे सांस्कृतिक रुझानों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और दुनिया की नजरें हम पर हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम उत्कृष्टता को अपना बेंचमार्क बनाएं। हमारा संकल्प होना चाहिए कि गुणवत्ता में न कोई कमी होगी और न कोई समझौता।” प्रधानमंत्री ने वर्ष 2016 में शुरू हुई ‘स्टार्टअप इंडिया’ की यात्रा को याद करते हुए इसे देश के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आज हमारे स्टार्टअप एआई, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी और सेमीकंडक्टर्स जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनकी कल्पना 10 साल पहले तक मुश्किल थी।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने आज ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर मतदाता के रूप में पंजीकरण को एक ‘उत्सव’ की तरह मनाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि जब कोई युवा पहली बार वोटर बने, तो समाज को उसका अभिनंदन करना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़े। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में तमसा नदी के पुनरुद्धार और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में ‘अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट’ की सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर प्रदूषित नदियों को साफ किया और सूखे प्रभावित क्षेत्रों में जलाशयों को नया जीवन दिया।

सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने ‘जीजी’ के बीच लोकप्रिय हो रहे ‘भजन क्लबिंग’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “युवा भक्ति को अपनी जीवन शैली में ढाल रहे हैं। मंच आधुनिक हो सकता है, लेकिन भजन की गरिमा और शुचिता अक्षुण्ण है।” उन्होंने मलेशिया में भारतीय प्रवासियों द्वारा तमिल भाषा के संरक्षण और वहां आयोजित ‘लाल पाड़ साड़ी’ वॉक की भी सराहना की।

प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के युवाओं के 11 लाख किलो कचरा साफ करने और मध्य प्रदेश के पन्ना में बीट-गार्ड जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा औषधीय पौधों का डेटाबेस तैयार करने जैसे प्रयासों को सराहा। उन्होंने बताया कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत अब तक 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। संबोधन के अंत में उन्होंने ‘श्रीअन्न’ के प्रति बढ़ते वैश्विक आकर्षण पर खुशी जताई। उन्होंने तमिलनाडु की महिला किसानों और राजस्थान के किसान उत्पादक संगठनों का उदाहरण दिया जो मोटे अनाज से ‘रेडी टू ईट’ उत्पाद बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आगामी फरवरी माह में होने वाले इंडिया एआई इंपैक्ट समित का उल्लेख करते हुए अपनी बात समाप्त की और देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी।

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