ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन हालात उससे कम भी नहीं हैं. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक टकराव चल रहा है. अमेरिका, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और मानवाधिकारों के आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान अमेरिका को मध्य-पूर्व में दखल देने वाला और प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला देश कहता है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. जिसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को पूरी जंग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. दोनों देशों के बीच बयानबाजी सैन्य तैयारियां, प्रतिबंध, साइबर और खुफिया कार्रवाइयां इस टकराव को और तेज कर रही हैं.

ईरान की ओर बढ़ रही विनाश की खेप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी. ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या या अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचे. उन्होंने ईरान को व्यापार समझौता करने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी.

सऊदी अरब ने दिया अमेरिका को झटका

ईरान भी अमेरिका के इस कदम को लेकर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है. ईरान की ओर से UAE से बातचीत की गई थी, जिसके बाद इस देश ने स्पष्ट कहा कि यह अपनी हवा, जमीन या पानी किसी भी हमला-सक्रियता के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. ऐसी ही बातचीत ईरान की सऊदी अरब से भी हुई है. इस देश ने भी अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वो अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेश्चकियान से बातचीत के बाद ये बात कही है. दोनों देश साफ कर चुके हैं कि वे किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने देश को लॉन्चपैड नहीं बनने देगा.

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