अमेरिकी डॉलर में मंगलवार को लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई, यह गिरावट 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट उस बयान के बाद और तेज हो गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें डॉलर के कमजोर होने से कोई परेशानी नहीं है. आयोवा में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “नहीं, मुझे यह ठीक लग रहा है. कारोबार को देखिए, डॉलर अच्छा कर रहा है.” उनके इस बयान के बाद डॉलर पर दबाव और बढ़ गया. ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स करीब 1.2% तक गिर गया और डॉलर सभी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ. यह गिरावट पिछले साल टैरिफ लागू होने के बाद से डॉलर की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है.
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स (DXY) में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. यह इंडेक्स, जो अमेरिकी डॉलर की मजबूती को छह प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स की मुद्राओं के मुकाबले मापता है, अप्रैल के बाद अब तक की सबसे तेज एकदिनी गिरावट पर पहुंच गया. इससे पहले 10 अप्रैल को डॉलर इंडेक्स करीब 2% गिरा था, जब अमेरिका की ओर से चीन पर 145% टैरिफ लगाने की धमकी दी गई थी. अब एक बार फिर तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
क्यों ट्रंप के बयान से डॉलर में और गिरावट का खतरा बढ़ा?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने बाजारों को यह संकेत दिया है कि अमेरिका की सरकार कमजोर डॉलर के पक्ष में हो सकती है. इससे ट्रेडर्स को डॉलर बेचने का “ग्रीन सिग्नल” मिला है. विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर डॉलर से अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलती है. यही वजह है कि ट्रंप की टिप्पणी के बाद डॉलर पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.














