भुवनेश्वर: ओडिशा में एक डीएसपी में इन दिनों अपने बालों की वजह से चर्चा में हैं। अपने बालों की वजह से उन्हें मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है। दरअसल ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में तैनात 49 वर्षीय डीएसपी रश्मि रंजन दास अपने चमकदार लाल रंग के बालों को लेकर पुलिस मुख्यालय के निशाने पर आ गए हैं। उन्हें अपने चमकीले बालों का रंग तुरंत बदलने का आदेश दिया गया है। उनकी वर्दी में लाल बालों वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो, जिससे मीम्स, मजाक और बहस का माहौल बन गया। वर्दी में उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मीम्स, टिप्पणियों और बहस का दौर शुरू हो गया, जिसके चलते उच्च अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, डीएसपी दास लंबे समय से इस हेयर कलर में नजर आ रहे थे, लेकिन बुधवार को उनकी तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गईं। इसके बाद गुरुवार को केंद्रीय रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सत्यजीत नाइक ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। उन्होंने डीएसपी दास को तत्काल अपने बालों का रंग प्राकृतिक रूप में रखने का निर्देश देते हुए औपचारिक चेतावनी जारी की। आईजी नाइक ने कहा कि पुलिस बल का सदस्य होने के नाते वर्दी की गरिमा, अनुशासन का अंदाजा उसके पहनावे और रूप-रंग से लगाया जा सकता है। वहीं, यह भी कहा गया कि इस तरह की दिखावटी छवि वर्दी की साख और प्रभाव को कमजोर करती है।
लोगों ने डीएसपी के पक्ष में उठाई आवाज
हालांकि, जमीनी स्तर पर राय बंटी हुई नजर आई। जगतसिंहपुर के कई स्थानीय निवासियों ने डीएसपी दास के पक्ष में आवाज उठाई। स्थानीय लोगों ने कहा कि वह अपराधियों के लिए सख्त माने जाते हैं और उनकी कार्यकुशलता पर कभी सवाल नहीं उठा। लोगों का मानना है कि किसी अधिकारी की योग्यता और ईमानदारी का मूल्यांकन उसके काम से होना चाहिए, न कि उसके हेयर स्टाइल से।
पहले भी दी थी सलाह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डीएसपी दास वर्तमान में मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ से जुड़े हुए हैं। सहकर्मियों का कहना है कि उन्हें पहले भी अनौपचारिक रूप से बालों का रंग बदलने की सलाह दी गई थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस मैनुअल में हेयर स्टाइल को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं है, लेकिन सादगी और अनुशासन की अपेक्षा जरूर की जाती है। डीएसपी रश्मि रंजन दास ने इस पूरे विवाद पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं, पुलिस मुख्यालय का संदेश साफ है कि खाकी वर्दी में अनुशासन और मर्यादा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।














