इंग्लैंड – अक्सर लोग मान लेते हैं कि एक तय उम्र के बाद जिंदगी एक ढर्रे पर चलने लगती है. पेशा तय, दिनचर्या तय और शौक कहीं पीछे छूट जाते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस सोच को तोड़ देते हैं. 52 साल की एक महिला वकील की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो दिन में अदालत में काले कोट में दलीलें पेश करती हैं और शाम होते ही पोल डांस की क्लास में पसीना बहाती हैं. यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि हकीकत है. उनका कहना है कि एक वक्त पर उन्हें लगने लगा था कि जिंदगी में कुछ कमी है, एक खालीपन जिसे भरना जरूरी था. उसी तलाश ने उन्हें एक बिल्कुल नई राह दिखाई.
लीशा एक बच्चे की मां हैं और उन्हें टाइप 1 डायबिटीज भी है. जनवरी 2025 में उन्होंने पोल डांसिंग क्लास जॉइन की. शुरुआत में हफ्ते में एक क्लास, फिर दो और अब वह हफ्ते में पांच क्लास करती हैं. उनका कहना है कि पहले शरीर सख्त रहता था, मगर अब ताकत और लचक दोनों आ गई है. पोल डांसिंग उनके लिए एक्सरसाइज भी है और खुद को आजाद महसूस करने का जरिया भी.
लीशा मानती हैं कि कई लोग उन्हें जज करते हैं. कुछ अपने भी इस फैसले से खुश नहीं थे. सोशल मीडिया पर ताने भी मिले. मगर उनका साफ कहना है कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता. वह खुश हैं और सेहतमंद हैं. यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह बताती है कि उम्र, पेशा या समाज की सोच, कुछ भी आपको खुद के लिए जीने से नहीं रोक सकता. लीशा बॉन्ड की कहानी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक पैगाम है. खुद का खयाल रखना, अपने दिल की सुनना और नई शुरुआत करना कभी देर नहीं होती.














