आर्टिकल- पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने एक पुरानी और टुकड़ों में बंटी श्रम प्रणाली का बोझ उठाया है, जो अक्सर उनके वेतन, सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है। असंगठित, संविदा और उभरते गिग क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक नीति-परिदृश्य में अदृश्य रहे हैं और बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहे हैं। चार श्रम संहिताएँ इन ऐतिहासिक अन्यायों का सुधार करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास का प्रतिनिधित्व करती हैं। लगभग तीन दर्जन अलग-अलग कानूनों को एक सुसंगत, एकल ढांचे में लाकर, ये संहिताएँ न्यायसंगत वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उन लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं, जो लंबे समय से वंचित रहे हैं। वर्षों के परामर्श और बहस के बाद इनका कार्यान्वयन, श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने तथा अधिक स्थिर और मानवतापूर्ण रोजगार वातावरण बनाने में निर्णायक क्षण का प्रतीक है।

एक जिम्मेदार ट्रेड यूनियन संगठन के रूप में, भारतीय ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू), कामगारों की दीर्घकालिक भलाई, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मोर्चा दृढ़ता से मानता है कि 12 फरवरी को श्रम संहिताओं के खिलाफ हड़ताल में भाग लेना न तो आवश्यक है और न ही वर्तमान समय में श्रमिक वर्ग के सर्वोत्तम हित में है।

श्रम संहिताएं कोई अचानक या एकतरफा हस्तक्षेप नहीं हैं। ये दो दशकों से अधिक समय तक चली सुधार प्रक्रिया का परिणाम हैं। 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, ताकि अनुपालन को सरल बनाया जा सके, अस्पष्टता को कम किया जा सके तथा कार्य और रोजगार की बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप भारत की श्रम रूपरेखा को आधुनिक बनाया जा सके।

श्रम संहिताओं को पूरी तरह खारिज करना उन मौलिक लाभों की उपेक्षा करता है, जो वे श्रमिकों को प्रदान करने का प्रयास करती हैं। वेतन संहिता सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन कवरेज और समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से मौजूद वेतन सुरक्षा के अंतर को दूर किया जा सकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, पहली बार, असंगठित, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की विधायी रूपरेखा तैयार करती है। इन श्रमिकों की संख्या लगभग 40 करोड़ है और पहले ये श्रमिक औपचारिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थे। ये प्रावधान भारत में श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का ऐतिहासिक विस्तार प्रस्तुत करते हैं।

औद्योगिक संबंध संहिता तथा पेशे से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-परिस्थिति संहिता का उद्देश्य औद्योगिक सद्भाव, तेज विवाद निवारण और सुरक्षित, स्वस्थ व अधिक सम्मानजनक कार्यस्थलों को बढ़ावा देना है। कुछ प्रावधानों को लेकर चिंताएँ हो सकती हैं, अनुभव बताते हैं कि व्यापक विरोध और हड़तालों से शायद ही रचनात्मक परिणाम मिलते हैं। संवाद, नियम-आधारित सुधार और मुद्दा-विशेष पर चर्चा के जरिये श्रमिकों के हित बेहतर तरीके से पूरे किये जा सकते हैं, बजाय इसके कि आपस में टकराव हो, जिससे पारिश्रमिक हानि, उत्पादन में रुकावट और रोजगार असुरक्षा का जोखिम पैदा होता है—विशेष रूप से श्रम बल के सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

यह दावा करना भी गलत है कि श्रम संहिताएँ बिना परामर्श के लागू की गई हैं। सुधार प्रक्रिया में त्रिपक्षीय चर्चाओं के कई दौर, संसद की स्थायी समितियों में विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद शामिल थे। एक लोकतांत्रिक प्रणाली में, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें बातचीत और संस्थागत संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, न कि उन व्यवधानों के द्वारा जो अंततः स्वयं श्रमिकों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

जब भारतीय अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूपांतरण के दौर से गुजर रही है और राष्ट्र विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, श्रमिक संघों को विघटन के बजाय जिम्मेदार कार्रवाई का चयन करना चाहिए। हमारी भूमिका केवल सुधारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह आकार देना है कि श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा को प्रभावी क्रियान्वयन और सतत सुधार के माध्यम से व्यावहारिक तौर पर मजबूत किया जा सके।

श्रमिक संघों की वास्तविक जिम्मेदारी केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरों को वास्तविक रूप में जमीनी स्तर पर लाभ हो। अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि श्रम संहिताओं को न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाए और इन्हें हर उस मजदूर तक पहुँचाया जाए, जिसे सुरक्षा की आवश्यकता है। हड़ताल की बजाय संवाद, सहयोग और निरंतर सुधार चुनकर, श्रमिक संघ एक ऐसा प्रणाली बनाने में मदद कर सकते हैं, जो श्रमिकों के लिए नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गरिमा प्रदान करती हो और साथ ही 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की यात्रा का भी समर्थन करती हो।
…………

(लेखक, भारतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू) के अध्यक्ष हैं)

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728