जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम से जुड़ी आपराधिक अपीलों को लेकर सख्त रुख अपना लिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब इन मामलों की सुनवाई में किसी भी तरह का स्थगन नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने आदेश दिया है कि 16 फरवरी 2026 से अपीलों पर हर रोज सुनवाई होगी.
वकील ने मांगा समय, कोर्ट ने नहीं मानी दलील
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ के सामने आसाराम समेत अन्य आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई हुई. इस दौरान आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज सिंह बाजवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. उन्होंने कहा कि अपील की पेपर-बुक हजारों पन्नों की है और मामला संवेदनशील है, इसलिए भौतिक रूप से सुनवाई के लिए कुछ समय दिया जाए.
कोर्ट ने कहा- अब कोई टालमटोल नहीं
अन्य अपीलों में एक वरिष्ठ अधिवक्ता पारिवारिक शोक के चलते उपस्थित नहीं हो सके, जबकि एक मामले में नए अधिवक्ता की नियुक्ति के कारण तैयारी के लिए समय मांगा गया. इन सभी दलीलों पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत मामला समयबद्ध है, इसलिए 16 फरवरी से सुनवाई अनिवार्य रूप से शुरू होगी और इसके बाद किसी भी प्रकार का स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा.
2018 से लंबित हैं अपीलें
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी अपीलों की सुनवाई रोजाना बोर्ड के अंत में या दोपहर 2 बजे से पहले की जाएगी. बहस पूरी होने तक लगातार सुनवाई जारी रहेगी. गौरतलब है कि ये अपीलें वर्ष 2018 से लंबित हैं और सुप्रीम कोर्ट पहले ही इनके शीघ्र निपटारे के आदेश दे चुका है.














