S-400 Missiles: भारत अब प्रेशर पॉलिटिक्स के खेल में नहीं फंसता. भारत वही फैसले लेता है जो उसके हक और हित में होता है. चाहे अमेरिका संग ट्रेड डील हो या यूरोपीय यूनियन संग. भारत ने हमेशा अपने हितों को सर्वोपरि रखा है. यही कारण है कि रिश्तों में तनातनी हुई, मगर देशहित से समझौता नहीं किया. अमेरिका संग ट्रेड डील इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. अमेरिका दावा कर रहा है कि भारत उससे ही तेल खरीदेगा. रूस से नहीं खरीदेगा. मगर भारत ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. रूस के मन में भी भारत के स्टैंड को लेकर कोई शंका नहीं है. यही कारण है कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, यह केवल अमेरिका कह रहा है. इस बीच भारत तेल के खेल में नहीं फंसने का फॉर्मूला ढूंढ लिया है.

दरअसल, ट्रेड डील को लेकर भारत और रूस के रिश्तों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. भारत-अमेरिका ट्रेड डील में तेल वाली बात ने इस सवाल को हवा दी है. मगर भारत ने अब तक अमेरिका की हां में हां नहीं किया है. इसका मतलब है कि अभी बातचीत जारी है. यही कारण है कि ऐसे वक्त में भारत ने रूस को फिर से साधने की कोशिश की है. जी हां, भारत रूस के साथ बहुत बड़ी डिफेंस डील करने जा रहा है. यह डील करीब 10 हजार करोड़ रुपए की है. भारत की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद ने रूस से 288 एस-400 मिसाइल की rs 10,000 करोड़ की डील को हरी झंडी दी है. यह वही एस-400 मिसाइल है, जिसने ऑपरेश सिंदूर में पाकिस्तान के इरादों को चकनाचूर कर दिया था.

क्यों अहम है यह डील?

एस-400 सिस्टम की मिसाइलों ने मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी हवाई हमलों को धूल चटा दी थी. इससे इस्लामाबाद की नींद उड़ गई थी. चीन को भी बड़ा झटका लगा था. कारण कि पाकिस्तान ने चीनी मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था. अब आप कह सकते हैं कि यह तो होना ही था. मगर डिप्लोमेसी में टाइमिंग का महत्व होता है. जब ट्रेड डील को लेकर रूस और भारत के रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे वक्त में ही भारत का रूस से एस-400 खरीदना अपने आप में मैसेज है. इस डील से पाकिस्तान का छटपटाना तय है, कारण कि इस मिसाइल ने उसे बहुत दर्द दिया है.

क्या है एस-400 मिसाइल डील

सबसे पहले जानते हैं एस-400 डील वाली डील को. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, डीएसी यानी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 288 एस-400 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी. इसमें 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें शामिल हैं. इसकी लागत rs 10,000 करोड़ है और फास्ट ट्रैक प्रोसीजर से जल्दी डिलीवरी होगी. ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने कमाल कर दिया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन मिसाइलों का यूज हुआ था. इसमें ये कुछ खर्च हो गए थे. इसकी पूर्ति के लिए ही भारत ने यह कदम उठाया है. इस एस-400 मिसाइल ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और आर्म्ड ड्रोन्स को रोका था. भारत को अब तक तीन एस-400 सिस्टम मिले हैं, दो और जून व नवंबर 2026 में आएंगे. इंडियन एयर फोर्स पांच और एस-400 सिस्टम्स चाहती है. अब 288 एस-400 मिसाइलों की डील हुई है.

भारत देख चुका है एस-400 की ताकत

इस तरह से यह डील रूस को साधने वाली है. वैसे भी भारत रूसी मिसाइलों की ताकत देख चुका है. इसे आज नहीं तो कल खरीदा जाना ही था. कारण कि भारत के पास सिस्टम तो हैं मगर ऑपरशन सिंदूर में मिसाइल खर्च हुए थे. इसलिए अभी के मौजूदा वक्त में टाइमिंग और डिप्लोमेसी के लिहाज से यह डील अपने आप में बेहद अहम है. चाहे कोई भी डील हो भारत ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पहले. ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने कई पाकिस्तानी विमान गिराए, जिससे इस्लामाबाद की हवा टाइट हो गई. इस तरह से चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ अब मुंह ताकते रह जाएगा. कारण कि चीन भी रूस का दोस्त है, मगर भारत की यह खरीद साउथ एशिया में बैलेंस बनाएगी. पाकिस्तान के चीनी जेएफ-17 जेट्स भी एस-400 के सामने फेल साबित हुए थे.

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