चेन्नै: तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने राज्य की 1.31 करोड़ महिलाओं के खातें में पांच-पांच हजार रुपये जमा करने का ऐलान किया है। 2021 के चुनावों में डीएमके ने अन्नाद्रमुक से सत्ता छीनी थी। अब जब तमिलनाडु चुनावों की दहलीज पर खड़ा है तब मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा है कि अगर डीएमके की सत्ता में वापसी हुई तो महिलाओं को मासिक सहायता 2000 रुपये दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कलैगनार अधिकार योजना के तहत महिलाओं को पांच-पांच हजार रुपये देने का ऐलान किया है। 2021 में सीएम बनने के बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में डीएमके का प्रदर्शन अच्छा रहा था। इस बार राज्य में उसका मुकाबला एनडीए से होगा। इसमें अन्नाद्रमुक और बीजेपी के साथ छोटी तमिल पर्टियां शामिल हैं।


स्टालिन ने महिलाओं की अपील

कलैगनार मगलिर उरिमै थोगाई योजना को लेकर सीएम स्टालिन ने कहा है कि द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) दोबारा सत्ता में आती है, तो महिलाओं को मिलने वाली मासिक सहायता 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 कर दी जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि फरवरी से तीन महीने तक यह अतिरिक्त सहायता दी जाएगी और गर्मियों के खर्चों के लिए अलग से 2,000 भी दिए जाएंगे। ऐसे में कुल पांच हजार रुपये खाते में भेजे जाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने महिलाओं से अपील की कि वे इस राशि का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और जरूरी घरेलू खर्चों के लिए करें। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी फिर से सत्ता में आएगी और योजना को और मजबूत करेगी। तमिलनाडु सरकार ने यह योजना 2021 में शुरू की थी। अब डीएमके ने वापसी होने पर इसकी राशि डबल करने का ऐलान कर दिया है।

अन्नाद्रमुक-टीवीए ने साधा निशाना
तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी पार्टी AIADMK के नेता एडापल्ली पलानीस्वामी ने ‘स्पेशल समर ग्रांट’ को सामाजिक कल्याण की बजाए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने इसे मतदाताओं को कैश देने की कदम बताया है, तो वहीं दूसरी ओर एक्टर विजय ने इस चुनावों में हार के डर से जोड़ा है। विजय ने कहा है कि चुनावी हार को देखते हुए डीएमके की सरकार ने यह ऐलान किया है। डीएमके का कहना है कि राज्य सरकार की घोषणा महिलाओं की वित्तीय सहायता और सश्क्तिकरण से जुड़ी है। 2021 के चुनावों में डीएमके को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 133 सीटें हासिल हुई थीं। AIADMK की अगुवाई वाला डीएमके 66 सीटें जीत पाया था। दोनों पार्टियों के वोटों में करीब साढ़े चार फीसदी का अंतर रहा था। इस बार के चुनावों में एक्टर विजय की पार्टी भी काफी वोट झटकेगी। ऐसे में दोनों पार्टियों के वोट खिसक सकते हैं।

दूसरे राज्यों में सफल रहा है प्रयोग
गौरतलब हो कि झारखंड में जेएमएम की वापसी के लिए मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, महाराष्ट्र में महायुति की जीत के लिए माझी लाड़की बहीण योजना को श्रेय दिया गया था। इतना ही नहीं बिहार में महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी गई थी। वहां भी यह दांव सटीक बैठा था। मध्य प्रदेश में महिलाओं को लाडली बहन योजना के तहत वित्तीय सहायता देने की शुरुआत की थी। बीजेपी की जीत में इस योजना को श्रेय दिया गया था, शिवराज सिंह चौहान इस योजना को लेकर आए थे, हालांकि जीत के बाद बीजेपी ने मोहन यादव को सीएम बनाया था। पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी ने लक्ष्मी भंडार स्कीम के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी के साथ बेरोजगारी भत्ते का ऐलान किया है।

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