कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले उनकी सरकार ने 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. कनाडाई मीडिया आउटलेट ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा सरकार ने राणा की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 65 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा फिलहाल भारत की जेल में बंद है, जहां उस पर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में सहायता करने के आरोप में मुकदमा चलाया जाना है. अप्रैल 2025 में उसे अमेरिका से प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया था. 26/11 के हमलों में 160 से अधिक लोगों की मौत हुई थी (आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 166 लोग मारे गए थे) और सैकड़ों घायल हुए थे.

रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने राणा को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि उसकी कनाडाई नागरिकता रद्द करने का इरादा है. हालांकि यह कार्रवाई सीधे तौर पर आतंकवाद के आरोपों से जुड़ी नहीं है, बल्कि कथित रूप से नागरिकता आवेदन के दौरान दी गई गलत जानकारी से संबंधित है.

तहव्वुर हुसैन राणा पर क्या है आरोप?

राणा 1997 में कनाडा गया था और 2001 में उसे कनाडाई नागरिकता मिली थी. IRCC के अनुसार, 31 मई 2024 को भेजे गए पत्र में कहा गया कि राणा ने नागरिकता के लिए आवेदन करते समय कनाडा में अपने निवास को लेकर गलत जानकारी दी थी. राणा ने साल 2000 में आवेदन करते हुए दावा किया था कि वह चार वर्षों तक ओटावा और टोरंटो में रहा. उसने उस अवधि में केवल छह दिन की गैरहाजिरी बताई थी, लेकिन रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की जांच में सामने आया कि वह ज्यादातर समय अमेरिका के शिकागो में था, जहां उसकी कई संपत्तियां थीं और वह इमिग्रेशन कंसल्टेंसी व अन्य व्यवसाय चला रहा था. यह मामला फिलहाल कनाडा की फेडरल कोर्ट में लंबित है. इमिग्रेशन विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त नागरिकता को रद्द करना सरकार की प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम है.

कौन है तहव्वुर हुसैन राणा?

पाकिस्तानी मूल के तहव्वुर हुसैन राणा पर डेविड कोलमैन हेडली और आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा तथा हरकत-उल-जिहादी इस्लामी से जुड़े आतंकियों के साथ मिलकर 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रचने का आरोप है. अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी. राणा ने प्रत्यर्पण रोकने के लिए अमेरिकी अदालतों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसकी सभी अपीलें खारिज कर दी गईं. अप्रैल 2025 में उसे भारत लाया गया, जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे गिरफ्तार कर लिया. मार्क कार्नी की भारत यात्रा से ठीक पहले उठाया गया यह कदम भारत-कनाडा संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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