उज्जैन | सिंहस्थ से दो साल पहले अवैध निर्माणों को लेकर प्रशासन और नगर निगम ने मेला क्षेत्र में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। शंकराचार्य मठ के चार मंजिला भवन समेत पांच बड़े अवैध निर्माण पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। मठ के 10-12 हजार वर्गफीट के भवन में कथित रूप से होटलनुमा ‘यात्रीगृह’ चल रहा था।
निगम ने जेसीबी और पोकलेन से भवन का अवैध निर्माण बुधवार सुबह प्रशासन, निगम, पुलिस का अमला लालपुल व नृसिंहघाट क्षेत्र पहुंचा। यहां पुण्यानंदगिरी महाराज के शंकराचार्य मठ, इंद्रेव महाराज आश्रम, निर्माणाधीन क्षत्रिय कलौता समाज पारमार्थिक न्यास, अभा चंद्रवंशी बागरी समाज व माधवानंद आश्रम के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। मठ में मंदिर के अलावा 40 से ज्यादा कमरों वाला जी+3 भवन था। एसी और नॉन-एसी कमरे थे। कथित रूप से ‘यात्रीगृह’ के रूप में संचालित था।
नोटिस दिए थे, उन्होंने निर्माण नहीं हटाए
मामले में उज्जैन नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि सिंहस्थ क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से निर्माण करने की सूचना थी। इससे सिंहस्थ के दौरान व्यवधान उत्पन्न होने की आशंका थी। संबंधितों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन उन्होंने अपने अवैध निर्माण नहीं हटाए। अब नगर निगम, जिला प्रशासन द्वारा इन्हें हटाया गया है।
मेला क्षेत्र में रोक, फिर भी किए पक्के निर्माण
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में किसी भी तरह के पक्के निर्माण पर रोक है। इसके बाद भी मठ में पक्के निर्माण किए गए। इसे होटल का रूप दिया गया। खास यह है कि दो साल पहले भी मठ के इस भवन पर कार्रवाई की गई थी।














