तिरुवनन्तपुरम: अगर मन में लगन हो तो कोई भी सपना सच हो सकता है। केरल की निसा उन्निराजन की कहानी हमें यह सब सिखाती है। निसा शादीशुदा हैं और बाद उनके दो बच्चे हैं। वह नौकरी भी करती थीं और घर की जिम्मेदारी भी संभालती थीं। इसके साथ ही उन्हें सुनने में भी दिक्कत थी। 35 साल की उम्र में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिससे उनके घर वाले भी हैरान थे। उनके बच्चे छोटे थे, फिर भी उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू करने का फैसला किया। हालांकि यह आसान नहीं था। वो दिन में नौकरी और घर का काम करती थीं। इसके बाद रात में वो पढ़ाई करती थी। उनकी दिनचर्या बहुत कठिन थी। लेकिन इस सब में उनकी बेटियां नंदना और थान्वी उनकी ताकत बनीं। उनके पति अरुण और परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया।

कई परेशानियों का सामना किया, हार नहीं मानी

निसा के लिए सुनने में परेशानी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद निसा ने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत करती रही। वो कई बार असफल होने के बाद भी उन्होंने कोशिश जारी रखी। 6 बार उन्होंने परीक्षा दी और इसमें सफल नहीं हो पाई, लेकिन निसा के मन में कुछ कर गुजरने के जज्बा था। आखिरकार, अपने सातवें प्रयास में उन्होंने 2024 की UPSC परीक्षा पास कर ली और लगभग 1000वीं रैंक हासिल की। यह उनकी कड़ी मेहनत और हिम्मत का परिणाम था।

सब-कलेक्टर रंजीत से प्रेरणा ली

निसा उन्निराजन ने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने तिरुवनंतपुरम के एक कोचिंग सेंटर से गाइडेंस लिया। उनका असली हौसला बनी सफल हुए यूपीएससी कैडिडेट्स की प्रेरणादायक कहानियां और मोटिवेशनल वीडियो। उन्होंने पढ़ाई का एक अलग तरीका अपनाया, और वो तरीका उनके लिए कारगर भी रहा। उन्होंने कोट्टायम के सब-कलेक्टर रंजीत से प्रेरणा ली जोकि खुद भी इसी चुनौती से जूझते हुए सफल हुए थे।

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