सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे मामले जो बेहद ही ज़रूरी हैं, जिन्हें सामान्य लिस्टिंग प्रक्रिया का इंतजार नहीं कराया जा सकता, सिर्फ उन्हें ही चीफ जस्टिस के सामने पेश किया जाएगा। भले ही वह संविधान बेंच की अध्यक्षता कर रहे हों। प्रचलित व्यवस्था के तहत अगर चीफ जस्टिस उपलब्ध नहीं होते या संविधान बेंच की सुनवाई में व्यस्त होते हैं तो ऐसे ज़रूरी मामलों को वरिष्ठतम जज के सामने लिस्ट कराने के लिए पेश किया जाता है।

कोर्ट नंबर 1 में ही होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने एक परिपत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे ज़रूरी मामलों की सुनवाई सिर्फ कोर्ट नंबर 1 में ही की जाएगी, जहाँ चीफ जस्टिस बैठते हैं। परिपत्र में यह भी साफ कहा गया है कि इस तरह के मामलों को किसी अन्य बेंच के सामने प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी।

क्या है उद्देश्य?

यह आदेश 29 नवंबर 2025 के परिपत्र का पूरक है, जिसमें सामान्य तत्काल मामलों को स्वतः सूचीबद्ध करने की व्यवस्था की गई थी। अब सिर्फ वो मामले जो सामान्य सूचीकरण की प्रतीक्षा नहीं कर सकते, सीजेआई के समक्ष ही प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य अदालती प्रक्रिया को ज़्यादा अनुशासित और केंद्रित बनाना है, जिससे अनावश्यक उल्लेखों को रोका जा सके और न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चले। वकीलों और पक्षकारों को अब इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन करना होगा।

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