अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि अमेरिका ईरानी और रूसी तेल पर छूट की अवधि नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि हम रूसी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेंगे। न ही ईरानी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण करेंगे।
यह वह तेल था जो 11 मार्च से पहले पानी में था। इसलिए इसका पूरा उपयोग हो चुका है। इन कदमों से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अब प्रतिबंधों में छूट का उपयोग करके तेल की आपूर्ति बढ़ाने और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को कम करने का प्रयास नहीं करेगा।
भारत को हुआ था फायदा
इन प्रतिबंधों में मिली छूट का भारत को बड़ा फायदा हुआ था क्योंकि इनकी वजह से नई दिल्ली होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास पैदा हुई रुकावटों के बावजूद रूसी तेल की खरीद जारी रख सका। इन रुकावटों के कारण समुद्र में कई जहाज फंस गए थे।
रूसी तेल की खरीद पर मिली छूट की वजह से भारत वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित कर सका। रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि के दौरान भारतीय रिफाइनरों ने लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए हैं।
रिलायंस समेत प्रमुख रिफाइनरों ने इस साल जनवरी में अमेरिका के दबाव के चलते रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से अपनी खरीद पहले ही कम कर दी थी, लेकिन उन्होंने जल्द ही अपनी रणनीति बदल ली और रूसी कंपनियों से ज्यादा तेल खरीदना शुरू कर दिया।
छूट मिलने के बीच ईरान का कच्चा तेल ले जाने वाले कम से कम दो सुपरटैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे। लगभग सात वर्षों में यह इस तरह की पहली खेप है। ऐतिहासिक रूप से भारत ईरान के कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है। रिफाइनरियों के साथ बेहतर अनुकूलता और व्यापार की अनुकूल शर्तों के कारण भारत, ईरान के हल्के और भारी ग्रेड के कच्चे तेल की बड़ी मात्रा में आयात करता रहा है।
अमेरिका ने जारी किया था लाइसेंस
मार्च में जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले प्रमुख ऊर्जा मार्ग को अपनी पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया था, तब अमेरिका ने 30 दिनों का एक लाइसेंस जारी किया था। इस लाइसेंस के तहत 12 मार्च से पहले लादे गए रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई थी और यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।
ईरानी तेल के लिए भी इसी तरह की एक छूट 20 मार्च को ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी की गई थी, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच सका और युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।



















