सरगुजा- शादी में आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से आई एक अनोखी शादी ने इस परंपरा को उल्टा कर दिया. यहां दुल्हन ही बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंच गई. सोशल मीडिया पर जैसे ही इस शादी का वीडियो सामने आया, लोग हैरान भी रह गए और खुश भी. वजह साफ है यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि परंपराओं से अलग हटकर सोचने की एक झलक है. हालांकि, इस कहानी में ट्विस्ट यह है कि यह “नई” नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पुरानी परंपरा का हिस्सा भी है.
सरगुजा में दिखी अलग परंपरा
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में दुल्हन देवमुनि एक्का बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंचीं. यह नजारा वहां मौजूद लोगों के लिए खास था, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पूरी तरह अनोखा नहीं है. कई आदिवासी समुदायों में लड़कियों का बारात लेकर जाना एक पारंपरिक प्रथा रही है. यानी जो चीज सोशल मीडिया पर “चौंकाने वाली” बताई जा रही है, वह दरअसल स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है. वीडियो में दिख रहा है कि विदाई के वक्त दूल्हा और लड़के वाले फूट फूटकर रो रहे हैं, जो कि देखने में काफी अलग लग रहा है.
मसीही रीति से हुआ विवाह, विदाई में खूब रोया दूल्हा
बारात पहुंचने के बाद दुल्हन और दूल्हे का विवाह मसीही (ईसाई) परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ. चर्च में दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया. यह शादी इसलिए भी खास बन गई क्योंकि इसमें आदिवासी परंपरा और मसीही रीति-रिवाज दोनों का खूबसूरत मेल देखने को मिला. इस शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो रहा है.
ऐसा क्यों किया गया ?
दरअसल, दुल्हन देवमुनि एक्का का कोई भाई नहीं है, वे चार बहनें हैं. पिता मोहन एक्का खेती-किसानी का काम करते हैं. दुल्हन देवमुनि एक्का के पिता किसी बेटे की तलाश में थे. इस बीच उन्होंने अपनी बेटी देवमुनि का रिश्ता बरवा परिवार में तय किया. दोनों परिवारों की सहमति से तय हुआ कि बिलासुस बरवा शादी के बाद दुल्हन के घर रहेगा. इसी के तहत यह अनोखी तरह की शादी संपन्न हुई. मोहन एक्का ने कहा कि कि यह फैसला भले समाज को अलग लगे, लेकिन उनके परिवार के लिए यह जरूरी था. वे दूल्हे को अपने घर ले जाकर बेटे की तरह रखेंगे.



















