रायपुर – छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके सरेंडर पर रोक लगा दी है और मामले में CBI से जवाब मांगा है।

अमित जोगी ने दो आदेशों को चुनौती दी थी—एक, CBI को अपील की अनुमति देने से जुड़ा और दूसरा, हाईकोर्ट का वह फैसला जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट  ने 6 अप्रैल को अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने अपनी कानूनी टीम का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि उन्हें न्याय मिलेगा।

गौरतलब है कि एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हत्या हुई थी। इस मामले में 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और वहां से सजा सुनाई गई।

यह मामला 2004 में CBI को सौंपा गया था, जिसने विस्तृत जांच के बाद हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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