रायपुर – राज्यपाल रमेन डेका ने शुक्रवार को लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल और गमछा का अवलोकन किया तथा राज्य के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए नवाचार, डिज़ाइन विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया।

राज्यपाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी एवं शाल में डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर आधुनिक डिज़ाइन विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाया जाए, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़ सके।

उन्होंने उत्तर-पूर्व के प्रसिद्ध रेशम क्षेत्र असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी क्षेत्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिज़ाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में समाहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि इससे राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिलेगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

राज्यपाल ने कोसा साड़ी को अधिक किफायती बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को पृथक रूप से तैयार कर नई शैली की साड़ियों के निर्माण का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रंगों एवं धागोंकृएक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न का उपयोग कर आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने आगामी एक माह में इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग  को राज्य की किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित तकनीकी विशेषज्ञों तथा डिज़ाइनर उपस्थित रहे।

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