कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान खत्म होने के बाद अब सबकी नजरें मतगणना पर टिकी हुई। 4 मई को होने वाली मतगणना के नतीजे ही यह तय करेंगे कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी। पश्चिम बंगाल में कई हाई प्रोफाइल सीटों पर मुकाबले बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। इन सभी सीटों पर टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। इन अलग-अलग मुकाबलों के अलावा, इलाके के हालात भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उत्तरी बंगाल में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है। वहीं, बीरभूम और पश्चिम बर्दवान में टीएमसी अपनी मज़बूत संगठन शक्ति की वजह से बेहतर स्थिति में दिख रही है। हालांकि, मुर्शिदाबाद, बांकुरा, पुरुलिया और पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों में मुकाबला बहुत कड़ा है और कोई भी पार्टी साफ तौर पर आगे नहीं दिख रही है।

आठ हाई प्रोफाइल सीटें जिनपर सबकी नजरें

1. भवानीपुर में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला: भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट बनी हुई है। इस सीट पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला बीजेपी के सुवेंदु अधिकारीअधिकारी से है। यह मुकाबला राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। 2021 में नंदीग्राम से जीत हासिल करने के बाद सुवेंदु अधिकारी अब मुख्यमंत्री को उनके ही गढ़ में चुनौती दे रहे हैं।

2. नंदीग्राम में सुवेंदु बनाम पवित्र कर: इस बार नंदीग्राम की लड़ाई 2021 से अलग है। उस समय मुकाबला ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी था। इस बार सुवेंदु अधिकारी को चुनौती उनके ही पूर्व करीबी और चुनाव प्रबंधक रहे पवित्र कर ने दी। पवित्र कर कभी दाहिना हाथ कहे जाने वाले पवित्र कर अब TMC के टिकट पर अपने ही पूर्व गुरु के खिलाफ खड़े हो गए थे।

3. दिनहाटा सीट: उतार-चढ़ाव भरे मिजाज के लिए मशहूर दिनहाटा विधानसभा सीट पर पहले भी बेहद करीबी मुकाबले देखने को मिले हैं। इनमें जीत-हार का अंतर सिर्फ़ 57 वोटों का भी रहा है। इसी वजह से यह उत्तरी बंगाल की एक बेहद अहम और निर्णायक सीट बन गई है।

4. आसनसोल दक्षिण: इस विधानसभा सीट पर बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल और टीएमसी के तापस बनर्जी के बीच मुकाबला है। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र बेरोजगारी और कोयला उद्योग में गिरावट से जुड़ी चिंताओं को दर्शाता है। इससे यह एक बारीकी से देखा जाने वाला शहरी मुकाबला बन गया है।

5. पानीहाटी सीट: इस सीट पर 2011 से टीएमसी काबिज है। बीजेपी ने इस सीट से आरजे कर पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ को टिकट देकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया था। यहां उनका मुकाबला टीएमसी के तीर्थंकर घोष के साथ था। 4 मई को पता चल जाएगा कौन इस सीट पर बाजी मारेगा।

6. भांगर सीट, नौशाद सिद्दीकी (आईएसएफ) बनाम शौकत मोल्ला (टीएमसी): एक अस्थिर और अल्पसंख्यक-बहुल सीट भांगर में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ISF के पास अभी यह सीट है, लेकिन टीएमसी इसे वापस पाने के लिए जोरदार कोशिश कर रही है।

7. बहरामपुर: यहां कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, बीजेपी के सुब्रत मैत्रा और टीएमसी के नारू गोपाल मुखर्जी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। अनुभवी नेता चौधरी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।

8. शमशेरगंज: यहां टीएमसी के मोहम्मद नूर आलम, कांग्रेस नज़मे आलम और बीजेपी के शस्ती चरण घोष के बीच मुकाबला है। हालांकि पिछले चुनावों में TMC ने यह सीट अपने पास रखी थी, लेकिन मुर्शिदाबाद में हाल की अशांति ने अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे इस बार यह एक कड़ा मुकाबला बन गया है।

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