प्रयागराज की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 46 साल पुराने एक हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश के भदोही के ज्ञानपुर से पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार-तृतीय ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी है. इसके अतिरिक्त, धारा 307 के तहत सभी को 10 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है. मंगलवार को दोषी करार दिए जाने के बाद बुधवार को अदालत ने सजा का औपचारिक एलान किया.
1980 की वह खूनी वारदात
यह पूरा मामला 11 फरवरी 1980 का है. उस दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय अपने खिलाफ दर्ज एक मुकदमे में जमानत के सिलसिले में जिला कचहरी पहुंचे थे. आरोप है कि इसी दौरान कचहरी परिसर में उन पर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस भीषण गोलीबारी में पांच अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए थे. घटना के बाद मृतक के बड़े भाई श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में विजय मिश्रा समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी.
विजय मिश्रा पर हत्या और रंगदारी के 70 से अधिक मुकदमे दर्ज
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह वारदात पुरानी रंजिश का परिणाम थी. इस मामले की कानूनी प्रक्रिया दशकों तक चलती रही, जिसमें कई बार उतार-चढ़ाव आए. सुनवाई के दौरान पत्रावली (केस फाइल) गायब किए जाने के गंभीर आरोप भी लगे थे. अंततः गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने विजय मिश्रा, जीत नारायण, संतराम और बलराम को दोषी पाया. गौरतलब है कि विजय मिश्रा पर हत्या और रंगदारी जैसे 70 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह वर्तमान में आगरा जेल में बंद हैं.



















