13 मई को सी.बी.एस.ई. ने कक्षा 12 के परिणाम घोषित किए, जिसमें उत्तीर्ण प्रतिशत में तीन अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले वर्ष के 88.39: से घटकर 85.20: हो गई है। कई छात्र पिछले वर्ष के छात्रों की तुलना में उत्तीर्ण प्रतिशत में पिछड़ गए होंगे। उत्तीर्ण प्रतिशत में यह भारी गिरावट इतनी तीव्र है कि  ‘‘इसे  इस वर्ष प्रश्नपत्र अधिक कठिन थे’’ जैसे सामान्य बहाने से टाला नहीं जा सकता।

सी.बी.एस.ई. ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एक नया इंटरफेस, ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओ.एस.एम.) सिस्टम पेश किया है, जिसकी औपचारिक घोषणा 9 फरवरी को एक विज्ञप्ति में की गई थी। इस प्रणाली के तहत, भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाएगा, एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा और मूल्यांकनकत्र्ताओं को सौंपा जाएगा जो कागज के बजाय कम्प्यूटर पर उनका मूल्यांकन कर सकेंगे। इस कदम को आधुनिकीकरण के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे स्कोरिंग प्रक्रिया तेज, अधिक कुशल और अधिक पारदर्शी बनेगी। हममें से अधिकतर लोग मानते हैं कि पढऩा तो पढऩा ही होता है, चाहे वह छपे हुए पन्ने पर हों या डिजिटल स्क्रीन पर। यह धारणा किसी ट्वीट या समाचार शीर्षक के लिए तो तर्कसंगत लग सकती है। लेकिन जैसे ही आप कोई लंबा निबंध पढऩा शुरू करते हैं, यह धारणा गलत साबित होने लगती है, क्योंकि इसमें विषयवस्तु के लिए आपको तर्क को समझना, एक साथ कई बिंदुओं को ध्यान में रखना और गुणवत्ता के बारे में समग्र निर्णय लेना आवश्यक होता है।

कक्षा 12 के मूल्यांकनकत्र्ता से ठीक यही काम करने के लिए कहा जाता है और वह भी सैंकड़ों बार, समय के दबाव में। ब्रिटिश जर्नल ऑफ एजुकेशनल टैक्नोलॉजी में 2010 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह जांच की गई कि क्या विस्तारित निबंध उत्तरपत्रों का मूल्यांकन करते समय अंकन विधि विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और पाया गया कि यद्यपि दोनों तरीकों में मार्कर की समग्र विश्वसनीयता काफी हद तक समान थी लेकिन कागज पर अंकन की तुलना में ऑनस्क्रीन अंकन में उल्लेखनीय रूप से अधिक भिन्नता थी। उस अध्ययन में केवल बारह परीक्षकों ने अपेक्षाकृत छोटे निबंधों की जांच की थी, लेकिन सी.बी.एस.ई. प्रणाली में लाखों उत्तर पुस्तिकाएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्यांकन हजारों शिक्षकों द्वारा किया जाता है, जिनमें से कई शिक्षक मूल्यांकन के लिए इस इंटरफेस का पहली बार सामना कर रहे होंगे।

हस्तलिखित उत्तरों को पढऩा काफी हद तक स्कैन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। एक लिखित पांडुलिपि जो अपने मूल रूप में पूरी तरह से पढऩे योग्य है, स्क्रीन पर एक धुंधली, अस्पष्ट छवि बन सकती है जिससे परीक्षक के लिए निष्पक्ष रूप से पढऩा मुश्किल हो जाता है, निष्पक्ष अंक देना तो दूर की बात है। स्क्रीन से होने वाली थकान भी एक प्रमुख कारण है। साथ ही, नए इंटरफेस को समझने और इस्तेमाल करने में लगने वाला मानसिक बोझ भी एक अहम कारक है।

इस प्रणाली को और अधिक लागू करने से पहले, सी.बी.एस.ई. को जो करना चाहिए था, और जो वह अभी भी कर सकता है, वह है एक उचित मूल्यांकन करना। उत्तर पुस्तिकाओं का एक सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नमूना लें। एक समूह को कागज पर और दूसरे समूह को स्क्रीन पर मूल्यांकन करने दें। न केवल अंतिम अंकों की तुलना करें, बल्कि अंकों के वितरण, असामान्य अंकों की आवृत्ति और उदार और सख्त मूल्यांकनकर्ताओं के बीच के अंतर की भी तुलना करें।

इस तरह के अध्ययन से आपको पता चल जाएगा कि सिस्टम इच्छानुसार काम कर रहा है या नहीं। जिस वर्ष नई मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई, उसी वर्ष उत्तीर्ण होने की दर में तीन प्रतिशत अंकों की गिरावट आना, कारण, कार्य संबंध का प्रमाण नहीं है। इसमें अन्य कारक भी शामिल हैं। परीक्षा की कठिनाई मायने रखती है। छात्रों की तैयारी मायने रखती है। लाखों युवाओं का शैक्षणिक भविष्य इन अंकों से जुड़ा है, क्योंकि कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा का स्कोर कॉलेज में प्रवेश और छात्रवृत्ति पात्रता का द्वार है, जो साधारण पृष्ठभूमि के छात्रों के पूरे जीवन पथ को आकार देगा। बोर्ड का यह दायित्व है कि वह पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ यह सिद्ध करे कि उसकी मूल्यांकन प्रणाली निष्पक्ष परिणाम दे रही है।-जॉन जेवियर

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