छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी संघ द्वारा पदोन्नति में हो रही विसंगतियों को दूर कराने को लेकर पावर कंपनी अध्यक्ष को लिखा गया पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष लॉ.एसएन पटेल के द्वारा पावर कंपनीज में कार्यरत कार्यालयीन कर्मचारियों की पदोन्नति में हो रही विसंगतियों को दूर कराने को लेकर पावर कंपनी के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी रायपुर को लिखे पत्र में संघ के प्रांताध्यक्ष लॉ.एसएन पटेल ने कहा है कि पावर कंपनीज प्रबंधन द्वारा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कार्यालयीन कर्मचारियों की वरिष्ठता को नजर अंदाज कर कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति प्रदान करने के कारण उत्पन्न हुई विसंगति से वरिष्ठ कर्मचारियों में काफी असंतोष एवं कुंठा पनप रही है। श्री पटेल ने निवेदन किया कि अविभाजित मप्रविमं के समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में एकमात्र रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ही स्थापना संबंधी कार्य हेतु अधिकृत था। रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय तृतीय चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नत कर अंबिकापुर, जगदलपुर तथा राजनांदगांव या अन्य अन्य स्थानों में पदस्थ करता था। छराविमं निर्माण पश्चात छत्तीसगढ़ में नये क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना हुई तथा पदानुसार क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा तृतीय चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची का पृथक-पृथक निर्माण किया गया तभी से वरिष्ठ कर्मचारियों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नत किये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है। श्री पटेल ने पत्र में निवेदन किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों द्वारा, पूर्व में भी अनेक बार कंपनी प्रबंधन से उपरोक्त समस्या के निदान हेतु अनुरोध किया गया था, परंतु आज दिनांक तक तत्संबंधित धनात्मक कार्यवाही नहीं की गई है। जबकि होल्डिंग एवं अन्य कंपनीज में वर्ष 2009 में सीधी भर्ती से नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी 2020 तक पदोन्नति पाकर डीजीएम बन गये अर्थात उन्हे 10 वर्ष की सेवा में ही दो पदोन्नति मिल गई जबकि तृतीय चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कार्यालयीन कर्मचारियों को 25 से 35 वर्ष की सेवा पश्चात भी पदोन्नति के अवसर प्राप्त नहीं हुये। संघ द्वारा पावर कंपनी के अध्यक्ष को प्रेषित पत्र में कहा गया है कि हमारा संगठन आपके संज्ञान में लाना चाहता है कि कार्यालयीन कर्मचारियों के अनुभवों का उपयोग प्रबंधन नहीं कर रहा है, अपितु सीधी भर्ती से आये प्रशासनिक अधिकारियों पहले पदोन्नति दिये जाने के कारण वरिष्ठ कार्यालयीन कर्मचारियों में अत्यंत निराशा एवं कुंठा व्याप्त होती जा रही है। यह भी अवगत कराया जाता है कि 1983-84 में सीधी भर्ती से आये कार्यालयीन कर्मचारी पदोन्नत नहीं हुए हंै जबकि 1986 से 1988 के मध्य सीधी भर्ती से आये कर्मचारी पदोन्नत हो गये है या अधिकारियों के समकक्ष उच्च वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। इसी प्रकार अनेक क्षेत्रीय मुख्यालयों में 1992 में सीधी भर्ती से पदस्थ कार्यालयीन कर्मचारी पदोन्नति प्राप्त कर चुके हैं। अर्थात 1983-84 में सीधी भर्ती से आये कर्मचारी 1992 में सीधी भर्ती से पदस्थ कर्मचारी से कनिष्ठ हो गये है जो कतई न्यायसंगत नहीं है। इसके अलावा सविनय यह भी अवगत कराया जाता है कि कंपनीज प्रबंधन द्वारा पिछले काफी दिनों से पदोन्नति आदेश जारी नहीं किये जा रहे हैं। इस वजह से प्रतिमाह पदोन्नति के आदेश का इंतजार करते हुए कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अत: महोदय से निवेदन है कि संपूर्ण प्रदेश में कार्यरत कार्यालय सहायक श्रेणी-एक की अनुभाग अधिकारी पद पर पदोन्नति हेतु केन्द्रीय वरिष्ठता सूची उन कर्मचारियों की कार्यालय सहायक श्रेणी-तीन पद पर हुई प्रथम नियुक्ति तिथि को आधार मानकर बनाई जावें ताकि वरिष्ठ कार्यालयीन कर्मचारियों को उनके वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नति मिल सके जिससे उनमें व्याप्त होती जा रही निराशा एवं कुंठा समाप्त हो सके।

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