कोलकाता : अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी गुस्से में हैं। पश्चिम बंगाल की सत्ता जाते ही टीएमसी विधायक दल में टूट का खतरा मंडराने लगा है। कोलकाता के एमएलए हॉस्टल में बागी ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मिलने वाले विधायकों की लंबी लिस्ट सामने आई है। हॉस्टल जाने वालों में मालदा-मुर्शिदाबाद के विधायक थे। ममता बनर्जी की मीटिंग से भी 80 में से 60 विधायक गायब रहे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने पार्टी में टीएमसी नेताओं की एंट्री बंद करने की घोषणा की है। मगर हालात ऐसे हैं कि विधानसभा में दो टीएमसी जल्द ही नजर आ सकती है। तृणमूल कांग्रेस और असली तृणमूल।

ऋतब्रत बनर्जी के बारे में जानिए

ऋतब्रत बनर्जी ने वाम संगठन एसएफआई से छात्र राजनीति शुरू की, फिर 2020 में टीएमसी से जुड़ गए। टीएमसी ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया। 2024 में वह दूसरी बार राज्यसभा सांसद बने। 2026 के विधानसभा चुनाव में वह उलूबेरिया पूरबा से जीते। फिलहाल उन्होंने टीएमसी में बगावत का झंडा बुलंद कर रखा है।

जाली दस्तखत से शुरू हुआ विवाद

बंगाल में बीजेपी की शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के साथ ही टीएमसी में बिखराव के बीज अंकुरित हो गए। हारने वाले उम्मीदवारों और कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के चुनावी डायलॉग और कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया। 19 मई को ममता बनर्जी ने जब समीक्षा बैठक बुलाई, उसमें भी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी को लेकर कड़े सवाल किए। ऋतब्रत बनर्जी ने फाल्टा में जहांगीर खान और अभिषेक के रिश्ते पर टिप्पणी की। इन सवालों का ममता बनर्जी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। फिर जाली दस्तखत का बवाल हुआ। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर दावा किया कि टीएमसी की ओर से भेजे गए लेटर में उनके दस्तखत जाली थे। दोनों को ममता बनर्जी ने पार्टी से बाहर कर दिया। इसके बाद टीएमसी के विधायकों के एक अलग गुट सक्रिय हुआ। टीएमसी विधायक दल की मीटिंग से 60 विधायक नदारद रहे।

ऋतब्रत बनर्जी करेंगे नेता विपक्ष का दावा

टीएमसी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया कि टीएमसी के लगभग 50 विधायक विधानसभा स्पीकर के पास जाएंगे और तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे। पहला, बागी विधायक दल में दो-तिहाई बहुमत होने और असली तृणमूल होने का दावा पेश करेंगे। दूसरा, चूंकि 50 विधायकों वाला गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय। तीसरा, बागी विधायक चुनाव चिन्ह पर भी दावा पेश करेंगे, क्योंकि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है । बंगाल में अभी शिवसेना महाराष्ट्र मॉडल लागू है। रिजू दत्ता ने कहा कि चुनाव में हार की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को लेनी होगी। जिन लोगों को अभिषेक बनर्जी हाथ पकड़कर टीएमसी में लाए थे, उन सभी ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा है। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को भी जिम्मेदारी लेनी होगी।

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