कैसा हो यदि आप किसी खतरनाक मोड़ पर पूरी रफ्तार से कार से जा रहे हो और अचानक सामने से कोई दूसरा वाहन आ जाए.. अभी तो ऐसे में एक्सीडेंट ही होगा, लेकिन आने वाले समय में ऐसी स्थिति में आपकी कार खुद रफ्तार कम कर देगी और जरूरत पड़ने पर ब्रेक भी लगा देगी। इतना ही नहीं यदि आप कार पार्क कर रहे हैं, तो पीछे टकराने से पहले खुद कार ब्रेक लगाकर रूक जाएगी। सड़कों की अधिकतम स्पीड के नियमों को भी गाड़ी खुद फॉलो करेगी। ऐसा सिस्टम किसी एक रोड पर नहीं, बल्कि देश के शहरों, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और गांवों की सड़कों पर भी होगा।

दरअसल, अब देश में स्मार्ट एंड इंटलीजेंट ट्रांसपोर्ट के नए युग की शुरूआत होने जा रही है। ये सिस्टम इतना हाईटेक होगा कि गाड़ियों को सड़कों के किनारे, पैदल यात्री, रूट व टै्रफिक सिग्नल तक पता चल जाएंगेे। जनवरी, 2026 में इसकी घोषणा के बाद अब केंद्र सरकार ने इसका पूरा रेग्युलेशन फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है। आगे सरकार एडवांस एआइ बेस्ड इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करेगी। अगले साल इसका ट्रायल का लक्ष्य है, जबकि दो डेमो पहले ही हो चुके हैं। सरकार की योजना ट्रायल के बाद तीन चरण में इसे लागू करने की है। इसमें सबसे पहले चुनिंदा शहर, दूसरे चरण में नेशनल हाईवे और तीसरे चरण में स्टेट हाईवे, ग्रामीण सडक़ व बचे नेटवर्क पर इसे अपनाया जाना है। विजन-2030 के तहत इस पर काम हो रहा है। देश की सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल एसोएिसशनों से भी सरकार की कई दौर की चर्चा इस पर हो चुकी है।

3 तकनीक एक साथ करेंगी काम

भारत ने एक दर्जन से ज्यादा देशों की स्टडी के बाद तीन प्रकार की तकनीक को सम्मलित करके लागू करना तय किया है। हाईपॉवर टॉस्क फोर्स ने इसकी रिपोर्ट दे दी है। इसमें पहली तकनीक वाहन टू वाहन कम्युनिकेशन की है। इसमें कार को तकनीक से लैस करेंगे, जिससे वह दूसरी कारों से कम्युनिकेशन कर सकेगी। दूसरी तकनीकी में वाहन टू इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें सड़क किनारें, मोड़, ब्लैक स्पॉट को तकनीक से लैस करेंगे। इससे वाहन इन्हें कम्युनिकेट कर सकेगा। तीसरी तकनीक में स्पेक्ट्रम के जरिए मोबाइल की पहचान है, जिससे पैदल चलने वाले की पहचान होगी। इन्हें कॉम्बो करके उपयोग किया जाएगा। नियमों में बदलाव के लिए आगे संसद सत्र में संशोधन लाया जा सकता है।

इन देशों में हुआ अध्ययन

यूके, ईयू, कनाडा, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया सहित एक दर्जन से ज्यादा देशों की स्टडी के बाद भारत को रेग्युलेशन फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। दूसरे देशों में केवल तकनीकी पहलू ही नहीं बल्कि कानूनी पहलुओं का भी अध्ययन किया है। विदेशों में ड्राइवर लैस कार तक चल रही है। इसलिए सरकार नए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट को जल्द लाने पर काम कर रही है। इसके चलते इन देशों की अलग-अलग तकनीक को कॉम्बो करना तय किया है। इसके तहत ही स्पेक्ट्रम के जरिए टेलीकॉम नेटवर्क व सैटेलाइट नेटवर्क को सबसे अधिक इस्तेमाल होगा।

लेकिन…प्राइवेसी का संकट

स्टडी में गाड़ी की लोकेशन को रीड करने का सिस्टम तैयार होने पर प्राइवेसी के संकट को लेकर चिंता जाहिर की गई है। सरकार ने ऑटोमोबाइल की एसोसिएशन सहित अन्य बड़े कारोबारियों को बुलाकर भी चर्चा की है। गाडिय़ों को इनबिल्ट अपडेट करने पर तीन दौर की चर्चा हो चुकी है।

ये सवाल और जवाब

  1. नया सिस्टम कब तक लागू होगा?-अभी दो डेमो हुए हैं। अगले साल ट्रायल की कोशिश है। अभी मैदानी क्रियान्वयन में समय लगेगा।
  2. क्या गाड़ी महंगी होगी, कोई लाइसेंस या शुल्क रहेगा?-तकनीक बढऩे पर कीमत पर असर आएगा। स्पेक्ट्रम शुल्क रहेगा। लेकिन, अभी कुछ तय नहीं है।
  3. नया सिस्टम कैसे काम करेगा?-सबसे अधिक गाडिय़ों में तकनीक लगाने पर काम होगा। सड़क किनारे तकनीक से लैस होंगे। स्पेक्ट्रम से मोबाइल पहचाने जाएंगे, जो पैदल यात्री की पहचान करेंगे।

टाइम लाइन: ऐसे हुआ काम

  • अप्रेल, 2024 में टॉस्क फोर्स बनाकर स्टडी।
  • मई, 2025 में टास्क फोर्स ने पार्ट-1 रिपोर्ट दी।
  • जनवरी, 2026 में टॉस्क फोर्स ने पार्ट-2 फाइनल रिपोर्ट दी।
  • अप्रेल, 2026 में कंसल्टेशन पेपर तैयार, सुझाव मांगे गए।
  • मई 2026 में रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क पर आगे के लक्ष्य तय।

ये बताते हैं आंकड़े

  • 150 अरब डॉलर से ज्यादा लोडिंग ट्रांसपोर्ट बाजार।
  • 1.73 लाख लोगों की मौत 2023 में सड़क दुर्घटना में।
  • 1.80 लाख लोगों की मौत 2024 में दुर्घटनाओं में हुई।
  • 92 फीसदी सड़क दुर्घटना मानवीय निर्णय में गलती से।
Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930