ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है और दोनों देशों ने इस पर आधिकारिक मुहर भी लगा दी है। इस शांति समझौते पर दोनों पक्षों ने डिजिटल हस्ताक्षर तो पहले ही कर दिए थे, अब इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर भी हो गए हैं। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने वर्साय पैलेस में फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए। वहीँ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने ईरान में ही इस पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के बाद यह 14-सूत्रीय शांति समझौता प्रभाव में आ गया है।

ट्रंप ने लिया ईरान की जब्त संपत्ति छोड़ने का फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14-सूत्रीय शांति समझौते के तहत ईरान की जब्त संपत्ति को छोड़ने का भी फैसला लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि किसी दूसरे देश के फंड को हमेशा के लिए रोककर रखने से अमेरिकी डॉलर और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली पर दुनिया का भरोसा कम हो सकता है। इस फैसले का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा, “हमने उनकी काफी संपत्ति फ्रीज़ की हुई थी। वो पैसा हमारे पास है। हमने उनका पैसा लिया है, ऐसे में यह साफ है कि वो हमारा पैसा नहीं है, बल्कि उनका पैसा है। हमें किसी न किसी समय ईरान को वो धनराशि वापस करनी ही थी क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते, तो कोई भी कभी डॉलर में निवेश नहीं करेगा।”

ईरान को सही बर्ताव करना होगा

हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान को अपनी जब्त संपत्ति के इस्तेमाल के लिए सही बर्ताव करना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद अब 300 बिलियन डॉलर की जब्त ईरानी संपत्ति छूट गई है, जिसका ईरान अब इस्तेमाल कर सकता है।

खुल गया होर्मुज स्ट्रेट

ईरान-अमेरिका शांति समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को भी खोल दिया गया है और अमेरिकी नाकेबंदी हटा ली गई है। इसके बाद जहाजों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का ट्रैफिक पहले की तरह हो जाएगा।

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