चेन्नई: तमिलनाडु की नई सरकार परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही है। सरकार के मंत्री आर निर्मलकुमार ने पहली बार स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार डीएमके की 5,000 एकड़ और 20,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ है। निर्मलकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ही परंदूर में इस परियोजना के विरोध से की थी। उनका कहना था कि यह परियोजना पर्यावरण और सैकड़ों किसानों की आजीविका पर असर डालेगी। मंत्री ने याद दिलाया कि विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने पर इस प्रोजेक्ट को रद्द कर देंगे और सरकार अब भी उसी रुख पर कायम है।
सरकार बनाएग दूसरा एयरपोर्ट
हालांकि मंत्री ने साफ किया कि सरकार चेन्नई के लिए दूसरे एयरपोर्ट के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि सरकार सिर्फ इस बात का विरोध कर रही है कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए उपजाऊ कृषि भूमि और जलाशयों को नष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से राय ली जाएगी कि क्या वैकल्पिक जमीन पर यह परियोजना शुरू की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री विजय जल्द ही परंदूर का दौरा कर इस प्रोजेक्ट को रद्द करने की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब डीएमके ने दावा किया था कि एयरपोर्ट के लिए जरूरी लगभग 50 फीसदी जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है और किसानों को 35 लाख से 1.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक मुआवजा दिया गया है।
चेन्नई के आसपास इतनी बड़ी जमीन मिलना आसान नहीं है। नए स्थान के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरफोर्स से मंजूरी लेने में लंबा समय लग सकता है।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी फनिंद्रा रेड्डी
फैसले का स्वागत किया
इस फैसले का परंदूर एयरपोर्ट विरोधी समूह ने स्वागत किया है। आंदोलन समिति के अध्यक्ष सुब्रमणियन ने कहा कि गांव के लोग इस फैसले से बेहद खुश हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकार इस जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क बनाना चाहती है और उससे पर्यावरण या खेती को नुकसान नहीं होता, तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी। वहीं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी फनिंद्रा रेड्डी ने इस फैसले को गलत बताया। उनका कहना है कि चेन्नई के आसपास इतनी बड़ी जमीन मिलना आसान नहीं है। नए स्थान के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरफोर्स से मंजूरी लेने में लंबा समय लग सकता है। यह मुद्दा अब तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बहस का विषय बन गया है।



















