रायपुर। कृषि महाविद्यालय, रायपुर एवं युमेट्टा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाविद्यालय के सेमीनार हॉल में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के परिचय के साथ हुआ। कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. निधिन जोसेफ थे, जो फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ हैं तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य, मधुमेह प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक एवं रोचक शैली में सत्र का संचालन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं एवं चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की तथा “तनाव क्या है?” विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की।

अपने व्याख्यान में उन्होंने तनाव के विभिन्न प्रकारों, जैसे शैक्षणिक तनाव, सामाजिक तनाव एवं व्यक्तिगत तनाव तथा उनके प्रभावों पर प्रकाश डाला। सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं एवं तनाव के कारणों को साझा किया, जिनमें दूसरों से तुलना करना, आत्म-संदेह, विवाह एवं नौकरी का दबाव, अत्यधिक चिंतन, चिंता, अकेलापन, पूर्णतावाद, कमजोर संवाद कौशल तथा नींद की कमी प्रमुख रहे। सामाजिक तनाव के अंतर्गत विद्यार्थियों ने बॉडी शेमिंग, सोशल मीडिया का दबाव, फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO), दूसरों के निर्णय एवं रिश्तेदारों के प्रश्नों को प्रमुख कारण बताया। वहीं शैक्षणिक तनाव के रूप में प्रयोगों की असफलता, कार्यभार का दबाव, सहानुभूति की कमी तथा शोध-पत्र प्रकाशन संबंधी तनाव की चर्चा की गई।

डॉ. जोसेफ ने विद्यार्थियों को तनाव से निपटने के लिए प्रभावी उपाय भी बताए। उन्होंने नियमित दिनचर्या एवं समय-सारिणी बनाने, छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने, आत्म-अनुशासन विकसित करने, अपनी रुचियों एवं शौकों को समय देने, आध्यात्मिकता अपनाने, संतुलित आहार लेने तथा आत्म-विश्लेषण करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अत्यधिक तनाव महसूस हो तो सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कार्यशाला में सुश्री प्रियंका बघेल, क्लिनिकल साइकोलॉजी में स्नातकोत्तर, डिप्लोमा इन रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी तथा वर्तमान में युमेट्टा फाउंडेशन की राज्य समन्वयक, ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर सहायता लेने के महत्व पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को बॉक्स ब्रीदिंग तकनीक का अभ्यास कराया गया, जिसे तनाव नियंत्रण एवं तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने की प्रभावी विधि बताया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक का भी अभ्यास किया, जो मानसिक एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव एवं चिंता को नियंत्रित करने में सहायक है। सत्र के दौरान अनेक मनोरंजक एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी भावनाओं एवं तनाव के स्रोतों को अभिव्यक्त किया। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को आत्मचिंतन एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंत में कृषि महाविद्यालय, रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए आयोजन टीम को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे तथा वे मानसिक रूप से अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी एवं संतुलित बनेंगे।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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