पलामू के सिक्का गांव में 10 दिनों के भीतर एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत से सनसनी फैल गई है. अंधविश्वास और ओझा के दिए भभूत को खाने की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग मौत की असली वजह तलाश रहा है.
पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में अज्ञात बीमारी से कोहराम मचा हुआ है. रविवार की मध्य रात्रि के बाद मृतक कुलदीप महतो के रांची स्थित रिम्स में इलाजरत बेटे नकुल महतो उम्र करीब 20 वर्ष की भी मौत हो गई. परिवार में पांचवीं मौत है. मालूम हो कि शनिवार की देर रात रांची रिम्स में इलाजरत पुत्रवधू श्वेता देवी उम्र करीब 28 वर्ष की मौत हो गई थी. इस रहस्यमयी बीमारी से पीड़ित एक ही परिवार में यह पांचवीं मौत है. अधिकारियों ने परिवार के बाकी एक सदस्य मृतक कुलदीप महतो की पत्नी लाखो उर्फ लाखी देवी (52 वर्ष) रांची रिम्स में इलाज चल रहा है.
अंधविश्वास के फेर में उजड़ रहा कुनबा
इस दुखद घटना के पीछे अंधविश्वास का एक बड़ा पहलू सामने आया है. पिता कुलदीप महतो और बेटी बबीता कुमारी की मौत के बाद परिवार के अन्य बीमार सदस्य आधुनिक इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े थे. इसी ओझा-गुणी के फेर में आकर वे बार-बार डॉक्टरों को चकमा देकर अस्पताल से भाग रहे थे. समय पर सही इलाज न मिलने और झाड़-फूंक में वक्त बर्बाद होने के कारण बीमारी बढ़ती गई. जिसके चलते एक-एक कर चार लोगों की जान चली गई. गांव के लोगों ने बताया कि प्रभावित परिवार ओझा-गुनी पर विश्वास करता था. छह माह पहले परिवार के लोग एक सदस्य के बीमार पड़ने पर ओझा के पास गए थे. वहां उसने उनको भभूत दिया और कहा कि इसे खाने पर बीमारी ठीक हो जाएगी. इसके बाद उक्त परिवार के सदस्य बीमार होने पर घर में उपलब्ध सरसों तेल में भभूत मिलाकर खाते थे. कुलदीप महतो ने कुछ दिन पहले ही सरसों का तेल पेरवाया था.
आखिर कौन सी बीमारी ले रही जान उठ रहे सवाल
सिक्का गांव में एक के बाद एक चार मौतों से इलाके में दहशत है. पिता कुलदीप महतो की मौत 19 जून की मध्य रात्रि और बेटी बबीता कुमारी की 20 जून की सुबह करीब 8 बजे मौत हो गई थी. एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने और दोनों शवों का पोस्टमार्टम होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग बीमारी का स्पष्ट पता नहीं लगा पाया है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि एक सप्ताह बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्यों नहीं आई. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि काफी प्रयास के बाद पीड़ितों को रांची रिम्स भिजवाया गया है. वे इलाज से क्यों कतरा रहे हैं और अस्पताल से क्यों भाग रहे थे. यह प्रबंधन के समझ से परे है.
एमएमसीएच में फोरेंसिक जांच की सुविधा नहीं
इस रहस्यमयी बीमारी का पता न चल पाने की सबसे बड़ी वजह एमएमसीएच मेदिनीनगर में संसाधनों की कमी है. अस्पताल में फोरेंसिक जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है. यही कारण है कि मृतकों के सटीक कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है. स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा.
कब हुई किसकी मौत ?
- 19 जून को परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की रात में अचानक मौत हो गई थी.
- 20 जून अगले ही दिन सुबह करीब आठ बजे बेटी बबीता कुमारी ने भी दम तोड़ दिया.
- 26 जून शुक्रवार की रात इलाज के दौरान नाबालिग बेटी इंदु कुमारी (16 वर्ष) की मौत हो गई थी.
- 27 जून शनिवार की देर शाम कुलदीप महतो की पुत्रवधू श्वेता देवी (28 वर्ष) की भी इलाज के दौरान मौत हो गई.
20 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम गई थी सिक्का गांव
19 जून की मध्य रात्रि में कुलदीप महतो और 20 जून को सुबह बेटी बबीता कुमारी की मौत की सूचना के बाद से स्वास्थ्य विभाग की टीम सिक्का गांव गई थी. लेकिन मृतक के अन्य चार पीड़ित परिवार घर पर नहीं मिले थे. जिसे बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा चैनपुर से रेस्क्यू कर एमएमसीएच में भर्ती कराया गया था. लेकिन सभी पीड़ित सदस्य अस्पताल से भाग गए थे. ग्रामीणों के अनुसार कुलदीप महतो और बेटी बबीता कुमारी के दाह संस्कार में शामिल हुए थे. लेकिन इसके फिर गांव से भाग कर कहां चले गए इसका कोई पता नहीं चल पा रहा था. इसी बीच शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम को पता चला कि पीड़ित परिवार लेस्लीगंज के पूर्णाडीह में हैं. इसके बाद चारों पीड़ित परिवार को मेदिनीनगर स्थित एमएमसीएच में भर्ती कराया गया. जहां देर रात नाबालिक इंदु कुमारी की मौत हो गई. दूसरे दिन शनिवार की देर शाम श्वेता देवी की भी मौत हो गई. इसके बाद अन्य दो सदस्यों लाखो उर्फ लाखी देवी और नकुल महतो को रांची रिम्स पहुंचाया गया था. जहां इलाज के दौरान रविवार की मध्य रात्रि नकुल महतो भी दम तोड़ दिया.



















