भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री क्षमताओं को लगातार विस्तार दे रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट-17A सीरीज़ के छठे युद्धपोत, स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि (F-38) को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा।

महेंद्रगिरि क्यों रखा गया है युद्धपोत का नाम

इस युद्धपोत का नामकरण पूर्वी घाट पर स्थित प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर किया गया है, जो लंबे समय से मजबूती, सहनशक्ति और अटूट इच्छाशक्ति की प्रतीक मानी जाती रही है। नौसेना के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी युद्धपोत को यह नाम दिया गया है।

क्या होता है स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत?

महेंद्रगिरि एक स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत है। स्टील्थ फ्रिगेट तकनीक से युद्धपोत दुश्मन के रडार पर सामान्य युद्धपोत की तुलना में कम नजर आता है। जिसके कारण युद्ध की स्थिति में यही विशेषता रणनीतिक व सामरिक बढ़त दिलाती है।

युद्धपोत का 75 फीसदी हिस्सा स्वदेशी

इस युद्धपोत का डिज़ाइन नौसेना के अपने वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया, जबकि इसका निर्माण मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में हुआ। खास बात यह है कि इसमें 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वदेशी है, जो भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। सैकड़ों छोटे और मझोले उद्यमों के साथ-साथ बड़ी रक्षा कंपनियों ने इसके पुर्जों, सेंसर और अन्य ज़रूरी हिस्सों की सप्लाई में हिस्सा लिया, जिससे रोज़गार के नए मौके भी बने।

क्या है INS महेंद्रगिरि की खासियत

स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि की खासियत की बात करें तो इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर और पनडुब्बी रोधी हथियार व एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है।

एक साथ कई खतरों से लड़ने में है सक्षम

यह एक साथ कई प्रकार के खतरों का सामना कर सकता है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सक्षम है। मिसाइल हमले के लिए तैयार है व पनडुब्बियां के खतरे से निपट सकता है। यानि कि यह समुद्र में एक पूर्ण युद्धक मंच के रूप में कार्य करता है।

मानवीय सहायता में भी करेगा काम

नौसेना के अनुसार महेंद्रगिरि केवल युद्ध के लिए नहीं बनाया गया है। यह मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों, खोज एवं बचाव कार्यों, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। चाहे समुद्र में फंसे लोगों को बचाना हो, किसी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत पहुंचानी हो या हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बनाए रखनी हो, महेंद्रगिरि हर प्रकार के मिशन के लिए तैयार है।

हिंद महासागर में रणनीतिक महत्व को भी बढ़ाएगा

हिंद महासागर आज व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक रणनीति की दृष्टि से बेहद अहम बन चुका है। ऐसे में महेंद्रगिरि जैसे आधुनिक युद्धपोत भारत को इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति बनाने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। जहाज़ का आदर्श वाक्य “माइटी-मैजेस्टिक-मैचलेस” है, जो आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री ताकत का प्रतीक बनेगा।

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