रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला लिया है. राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी शासकीय सेवक के खिलाफ गबन, वित्तीय हानि या शासकीय धनराशि की वसूली से जुड़ी कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही या विभागीय जांच चल रही हो और इस दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो वह कार्यवाही तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जाएगी.

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में राज्य के सभी विभागों, राजस्व मंडल के अध्यक्ष, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों, कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को कड़ाई से पालन करने के लिए परिपत्र जारी कर दिया गया है.

नए दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु:

  • जांच के दौरान मृत्यु पर राहत: छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियमों के तहत, यदि किसी सेवारत या सेवानिवृत्त शासकीय सेवक की विभागीय जांच के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो मामले को वहीं बंद कर दिया जाएगा.
  • गबन और वसूली मामलों में भी लागू: सरकार ने साफ किया है कि यह नियम शासकीय धनराशि के गबन, वित्तीय नुकसान या वसूली से जुड़े मामलों पर भी समान रूप से लागू होगा. अपचारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद ऐसी सभी अनुशासनात्मक कार्यवाहियां समाप्त मानी जाएंगी.
  • जीवित रहते आदेश होने पर ही होगी वसूली: परिपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि शासकीय सेवक के जीवित रहते हुए ही नियमानुसार रिकवरी (वसूली) या दंड का आदेश पारित किया जा चुका है, केवल उसी स्थिति में उनके देय स्वत्वों (Dues) से राशि की वसूली की जाएगी.

कड़ाई से पालन के निर्देश: शासन ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है.

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