देशभर में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन लोग सुबह से ही नदी के तट पर जाकर स्नान करेंगे. हिन्दू मान्यता के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है. इस दिन लोग सुबह उठकर स्नान ध्यान करते हैं. नदी तट पर स्नान करना भी शुभ माना जाता है. इसके बाद लोग भगवान सूर्य की पूजा करते हैं. साथ ही साथ दान पुण्य भी करते हैं. इस दिन दान पुण्य करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, इस दिन तिल का लड्डू भी खाया जाता है. इस दिन लोग अपने परिवार जनों की लंबी आयु की कामना भी करते हैं.
जानिए क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व
पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व है. इस दिन पौष मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों को मारकर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था. यह मकर संक्रांति के दिन हुआ था. तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा.
14 जनवरी को किया जाएगा पहला पावन स्नान
कुंभ का पहला पावन स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर किया जाएगा. वहीं, कुंभ का आयोजन इस बार हरिद्वार में होगा. ऐसा कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर कुंभ स्नान करने से कालसर्प और पितृदोष का प्रभाव कम होता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव प्रात: 8 बजकर 20 मिनट के करीब धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे. पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्य काल सूर्यास्त तक बना रहेगा.
शाही स्नान का शुभ मुहूर्त
पहला शाही स्नान: 11 मार्च शिवरात्रि
दूसरा शाही स्नान: 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या
तीसरा मुख्य शाही स्नान: 14 अप्रैल मेष संक्रांति
चौथा शाही स्नान: 27 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा

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