कोलकाता में चार लोग कोविड-19 से संक्रमित होकर अस्पतालों में भर्ती किए गए, तो बिहार के भागलपुर में एक पिता और उनकी बेटी को अस्पताल में आईसीयू में भर्ती होने की नौबत आ गई. पूरी दुनिया को हिलाकर रख देने वाला कोरोना वायरस एक बार फिर चर्चा में है. पिछले कुछ दिनों के दौरान पूरे देश में करीब साढ़े तीन सौ कोविड पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. सबसे अधिक 115 मामले केरल से तो कर्नाटक से 64, महाराष्ट्र से 43, तमिलनाडु से 39, अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 18, राजधानी दिल्ली से 18, राजस्थान से 12 और कई अन्य राज्यों से भी कुछ कोविड पोजिटिव मामले सामने आए हैं. चार लोगों की मौत भी हो चुकी है. क्या यह नई कोविड लहर की शुरुआत है? अचानक कोविड के मामले क्यों बढ़ने लगे हैं?
सबसे पहले जानते हैं कि कोरोना का देशभर में क्या हाल है?
रविवार को कोरोना वायरस के दो मामले बिहार के भागलपुर से रिपोर्ट किए गए. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दोनों पिता और बेटी हैं. पिता की तबीयत पहले से खराब थी और वो निजी अस्पताल में भर्ती थे लेकिन स्वास्थ्य अधिक बिगड़ने से उन्हें जिले के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां कोविड-19 के होने की पुष्टि हुई. उनके साथ मौजूद उनकी बेटी का भी टेस्ट किया गया और वो भी कोरोना पॉजिटिव पाई गईं. दोनों मरीजों को इंटेंसिव मेडिकल केयर में रखा गया है. साथ ही कोविड-19 प्रोटोकॉल को भी एक्टिव कर दिया गया है. साथ ही संक्रमित शख्स के घर के आसपास रहने वालों की जांत के निर्देश भी दिए गए हैं.
उधर कोलकाता में भी कोविड के मामले में वृद्धि देखने को मिली है. कोरोना वायरस से संक्रमित तीन लोगों को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं एक 10 वर्षीय बच्चे को भी कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया है और उसका इलाज किया जा रहा है.
एक्सपर्ट ने क्या बताया?
NDTV से बात करते हुए कोलकाता फोर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट कंसल्टेंट और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. सुभजीत सेन ने कहा, “कोविड-19 का मौजूदा पैटर्न ओमिक्रॉन लहर जैसा ही है, जिसमें अधिकांश मरीजों को फेफड़े से जुड़े लक्षण- जैसे बुखार, गले में खराश, खांसी और बदन दर्द देखने को मिल रहे हैं. हालांकि बुजुर्गों और पहले से इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने का अधिक खतरा बना हुआ है.”
उन्होंने बताया कि तीन मरीजों का इलाज किया जा रहा है जिनमें से एक की तबीयत ठीक हो गई है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. लेकिन दो अन्य लोगों में ऑक्सीजन की कमी की वजह से उन्हें आईसीयू में भेजना पड़ा, जहां फिलहाल उनकी हालत स्थिर है.
आंध्र प्रदेश में कोविड से चार मौतें
अब तक जिन चार मरीजों की मौत हुई है उनमें से सभी आंध्र प्रदेश से हैं. राज्य से अब तक कुल 12 कोविड पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. एक मरीज को पहले से डायबिटीज था और वो किडनी की गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहा था. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. वहीं अन्य मृतकों को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण समेत कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायत थी.
आंध्र प्रदेश में कोविड के 12 मामले सामने आए हैं और चार मरीजों की मौत हुई है. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है. एक मरीज पहले से डायबिटीज और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था. इलाज के दौरान उसकी मौत हुई और बाद में आरटी-पीसीआर जांच में कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई. दूसरे अन्य मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण समेत कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायत थी. इनके सीटी स्कैन में फेफड़ों को भारी नुकसान मिला और इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई. मृतकों में कडप्पा से तीन और एक काकीनाड़ा जिले से हैं.
बाकी संक्रमित मरीजों की निगरानी की जा रही है. कई लोग होम आइसोलेशन में हैं. इस समय तीन मरीज होम आइसोलेशन में हैं तो दो अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं. तीन मरीज कोरोना से उबर चुके हैं और अस्पताल से उन्हें छुट्टी मिल चुकी है.
क्या यह कोरोना की नई लहर है?
पूरे देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों में आई इस बढ़ोतरी की खबरों ने कुछ साल पहले देश में आई खतरनाक लहरों की यादें ताजा कर दी हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि आज की स्थिति महामारी के चरम के दौरान भारत द्वारा सामना की गई स्थिति से बहुत अलग है. फिलहाल, संक्रमण में बढ़ोतरी पूरे देश के बजाय कुछ खास इलाकों तक ही सीमित है. आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के मामलों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें कुछ मौतें भी शामिल हैं, जिसके कारण राज्य को निगरानी, टेस्टिंग और अस्पताल की तैयारियों को मजबूत करना पड़ा है. कुछ अन्य शहरों और राज्यों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है. हालांकि, अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़, ऑक्सीजन की कमी या स्वास्थ्य सेवा पर भारी बोझ जैसी स्थिति नहीं देखी जा रही है, जो पिछली कोविड-19 लहरों के दौरान देखी गई थी.
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ये छिटपुट मामले हैं. इन्हें बड़े प्रकोप या नई लहर नहीं माना जा सकता. स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक पिछले कई दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है. इसलिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. फिर भी सरकार पूरी सतर्कता बरत रही है.
आखिर फिर कहां से आ गया कोविड?
एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कोविड-19 के साथ-साथ इन्फ्लूएंजा, एडेनोवायरस और राइनोवायरस के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह से खांसी, बुखार, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
एक्सपर्ट का कहना है कि कोरोना वायरस देश से पूरी तरह गायब नहीं हुआ था. उनका कहना है कि अब यह वायरस फ्लू की तरह हमारे समाज का हिस्सा बन चुका है, जो पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बल्कि कभी-कभी छिटपुट रूप से सामने आता है.
अभी की कोविड-19 स्थिति अलग क्यों है?
जानकारों का मानना है कि बीमारी के कम गंभीर होने की वजह वैक्सीनेशन और पहले हुए इन्फेक्शन से बनी व्यापक इम्यूनिटी है, जिसने ज्यादातर स्वस्थ लोगों में गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी कम कर दिया है. हालांकि कोविड-19 अभी भी इन्फ्लूएंजा और आरएसवी जैसे दूसरे रेस्पिरेटरी वायरस के साथ फैल रहा है, लेकिन अब अधिकांश लोगों के लिए इसे संभालना काफी हद तक आसान हो गया है.
गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. अमिताभ पार्टी के अनुसार, अब घबराने के बजाय लक्षणों की जल्द पहचान करने और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
घबराएं नहीं, तैयारी रखें
एक्सपर्ट बिना जरूरत के घबराहट में टेस्ट करवाने के खिलाफ भी सलाह देते हैं. बिना क्लिनिकल वजह के बार-बार टेस्ट करवाने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. हल्के इंफेक्शन से ठीक होने के लिए घर पर आइसोलेशन, शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखना, पौष्टिक खाना और भरपूर आराम करना सबसे जरूरी है. एक्सपर्ट का मुख्य संदेश है कि घबराएं नहीं.
कोविड-19 अब वैसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी नहीं रही जैसी पहले थी, लेकिन यह पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई है. जिम्मेदार व्यवहार, लक्षण दिखने पर जल्द टेस्ट करवाना, समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और आइसोलेशन के नियमों का पालन करना ही बीमारी को फैलने से रोकने और आसानी से ठीक होने के सबसे अच्छे तरीके हैं.
सतर्क रहना, खासकर यात्रा और मौसम बदलने पर होने वाले उछाल के दौरान, लोगों और परिवार के कमज़ोर सदस्यों की सुरक्षा में मदद कर सकता है.
फिर चिंता किस बात की है?
डॉक्टरों की चिंता यह है कि कुछ मरीजों में सांस की तकलीफ तेजी से बढ़ी. इसलिए आशंका जताई गई कि कहीं कोई अधिक संक्रामक ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट तो जिम्मेदार नहीं है. हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
संक्रमित मरीजों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं, जहां जीनोम सीक्वेंसिंग से पता लगाया जाएगा कि वायरस का कौन सा वैरिएंट मौजूद है.
राज्य सरकारों का कहना है कि विशेषज्ञों की शुरुआती समीक्षा में किसी नए खतरनाक वैरिएंट के संकेत नहीं मिले हैं.
सरकार ने क्या कदम उठाए?
जहां संक्रमण पाए गए वहां रैपिड रिस्पॉन्स टीमें भेजी गई हैं. संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर जांच की जा रही है. अस्पतालों में आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं
भीड़भाड़ वाली जगहों और अस्पतालों में मास्क पहनने की सलाह दी गई है. इसके अलावा बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत जांच और जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन की व्यवस्था की जा रही है. सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान भी तेज कर दिया गया है.
क्या ओमिक्रॉन अब भी खतरनाक है?
ओमिक्रॉन तेजी से फैलने वाला वैरिएंट माना जाता है, लेकिन पहले की तुलना में अब ज्यादातर लोगों में इसके कारण गंभीर बीमारी का खतरा कम है. इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों में बनी इम्युनिटी है, जो वैक्सीन और पिछले संक्रमण से विकसित हुई.
फिर भी अगर बुखार, खांसी, गले में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो तो जांच कराएं. भीड़भाड़ वाली जगहों और अस्पतालों में मास्क पहनें. हाथों की सफाई का ध्यान रखें. बुजुर्ग और गंभीर बीमारी वाले लोग भीड़ से बचें. बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें.
आंध्र प्रदेश में कोविड से हुई मौतें स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी जरूर हैं, लेकिन फिलहाल इन्हें कोविड-19 की नई लहर नहीं माना जा रहा.



















