- IPS अंजलि विश्वकर्मा मूल रूप से देहरादून की हैं
- अंजलि और उदित पुष्कर 2021 में बने आईएएस
- तेजतर्रार और नेविगेशन तकनीक में माहिर हैं अंजलि
कानपुर: 2021 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अंजली विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश कैडर छोड़ दिया है। अब वे छत्तीसगढ़ कैडर में अपनी सेवाएं देंगी। गृह मंत्रालय ने उनके कैडर में बदलाव का आदेश जारी कर दिया है। उनका कैडर शादी के आधार पर बदला गया है। उनके पति आईपीएस उदित पुष्कर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के निवासी हैं और वे छत्तीसगढ़ में तैनात हैं। इसी आधार पर अंजली ने उनका कैडर यूपी से बदलकर छत्तीसगढ़ करने का आवेदन दिया था। इस पर 20 जुलाई को आदेश जारी कर दिया गया है। अब अंजलि और उनके पति एक ही कैडर में सेवाएं देंगे।
अंजलि के पति IPS उदित पुष्कर रायपुर में तैनात
अंजलि विश्वकर्मा और उदित पुष्कर दोनों ही सन 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। पुष्कर इस समय रायपुर में राजभवन में राज्यपाल के परिसहाय, यानी Aide-de-Camp’ (ADC) के पद पर तैनात हैं। फिलहाल यह तय नहीं है कि अंजलि को छत्तीसगढ़ में किस स्थान पर पोस्टिंग दी जाएगी। अंजलि विश्वकर्मा तेजतर्रार पुलिस अधिकारी हैं और उनका 5 साल का कैरियर शानदार रहा है। वे कानपुर में मार्च, 2025 से एडीशनल डीसीपी (साइबर क्राइम) के पद पर तैनात हैं।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वालीं अंजलि विश्वकर्मा सन 2021 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुई थीं और दिसंबर, 2023 में उनकी सेवाएं कन्फर्म की गई थीं। एक जनवरी, 2025 को उनको सीनियर स्केल दिया गया था। उनको 26 जनवरी, 2026 को सेवा सम्मान (डीजी प्रशंसा डिस्क- सिल्वर) से नवाजा गया था।
साइबर क्राइम सुलझाने में माहिर नेविगेशन इंजीनियर
आईआईटी कानपुर से नेविगेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने वालीं आईपीएस अंजलि विश्वकर्मा को साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने में महारत हासिल है। उन्होंने हाल ही में बच्चियों के अश्लील वीडियो बनाकर गूगल ड्राइव पर अपलोड करने वाले एक 26 साल के आरोपी को पकड़ा था। वह कानपुर के चमनगंज इलाके में यह करतूतें करता था। अंजलि ने नेशनल साइबर रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म (NCRP) और गूगल से मिले डिजिटल सुरागों को आपस में जोड़कर इस गंभीर और संवेदनशील मामले को सुलझाया था। आरोपी अपनी चचेरी बहनों और पड़ोस की बच्चियों के वीडियो गूगल ड्राइव में छिपाकर रखता था। उसके पास से 15 अश्लील वीडियो बरामद किए गए थे।
अंजलि ने सुलझाए कई जटिल केस
अंजलि विश्वकर्मा को पहली पोस्टिंग झांसी में मिली थी। वहां उन्होंने लापता हुई एक 15 साल की बच्ची को इंस्टाग्राम रील में दिखाई दिए एक दरवाजे के छोटे से नंबर के आधार पर सैकड़ों किलोमीटर दूर खोज निकाला था। उन्होंने महाराष्ट्र के पिंपरी में बच्ची को सकुशल छुड़ा लिया था।
सुरागों से साजिशों का पर्दाफाश
कानपुर में इमरान हत्याकांड की जांच के दौरान में अपराध स्थल पर अंजलि को ‘नाइट्राबेट’ नाम की दवाई के रैपर मिले थे। वे इसी सुराग के जरिए हत्यारों तक पहुंचने में कामयाब हो गई थीं। उन्होंने एक ऐसे चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह का पर्दाफाश किया था जो कि बच्चों को 30 से 50 हजार रुपये में बेचता था। उन्होंने गिरोह के सदस्यों और अंकित आनंद सहित बच्चों को खरीदने वाले अन्य आरोपियों को धरदबोचा था।
स्कूल के दिनों की दोस्ती बाद में प्यार में बदली
तेजतर्रार पुलिस अधिकारी अंजलि विश्वकर्मा को ‘लेडी सिंघम’ भी कहा जाता है। इनका करियर जितना शानदार रहा है, उतनी ही शानदार उनकी और उदित पुष्कर की लव स्टोरी है। उन दोनों में स्कूल में दोस्ती के साथ प्यार की कोंपलें खिली थीं। बाद में कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में भी वे साथ-साथ थे। इसके बाद अंजलि ने छह देशों में नौकरियां कीं और फिर भारत लौटकर उदित पुष्कर के साथ ही न सिर्फ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा की तैयारी की, बल्कि दोनों साथ-साथ ही आईपीएस बने।
उत्तराखंड की टॉपर रहीं अंजलि
अंजलि विश्वकर्मा का जन्म 11 जनवरी 1993 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने सन 2011 में देहरादून की कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से शिक्षा ली थी। उन्होंने 12वीं कक्षा की परीक्षा में 97.7 प्रतिशत नंबर हासिल करके उत्तराखंड में टॉप किया था। स्कूली शिक्षा के दौरान ही अंजलि की दोस्ती उदित पुष्कर से हो गई थी। इसके बाद अंजलि और उदित ने जेईई परीक्षा में सफलता हासिल की और उन दोनों का आईआईटी कानपुर में एडमीशन हो गया।
कई देशों में नौकरी के बाद भारत वापसी
अंजलि विश्वकर्मा ने 2018 में नेविगेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया और उदित पुष्कर ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। बीटेक होने के बाद अंजलि को एक ऑयल कंपनी में नौकरी मिल गई। इस नौकरी के दौरान उन्होंने मेक्सिको, नॉर्वे, यूके, मलेशिया, सिंगापुर, अबू धाबी और न्यूजीलैंड में सेवाएं दीं। इस नौकरी में उनकी पैकेज करीब 48 लाख रुपये प्रति वर्ष का था।
उदित की प्रेरणा से पकड़ी यूपीएससी की राह
उधर अंजलि विदेशों में नौकरी करती रहीं, इधर उदित यूपीएससी की तैयारी करते रहे। बताया जाता है कि उदित पुष्कर ने अंजलि को यूपीएससी परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। इस पर सन 2018 में वे आयल कंपनी की नौकरी छोड़कर भारत लौट आईं। उन्होंने वापसी के बाद उदित के साथ यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उदित पूर्व में यूपीएससी में चयनित होकर सीआरपीएफ में असिस्टेंड कमांडेंट बन गए थे। हालांकि उन्होंने यह नौकरी कुछ अरसे बाद छोड़ दी थी और फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट गए थे। सन 2020 की यूपीएससी परीक्षा में अंजलि विश्वकर्मा को ऑल इंडिया रैंक 158 और उदित पुष्कर को 674 मिली।
दूरी मिटाने के लिए बदल दिया अपना कैडर
आईपीएस बनने के बाद अंजलि को पहली पोस्टिंग झांसी में मिली। उदित को पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मिली थी। अंजलि यूपी कैडर में थीं और उदित छत्तीसगढ़ कैडर में थे। हालांकि प्यार के बंधन में बंधे अंजलि और उदित ने सन 2024 में शादी कर ली। उत्तर प्रदेश के कानपुर से रायपुर 800 किलोमीटर से अधिक दूर है। यह दूरी मिटाने के लिए अंजलि विश्वकर्मा ने अपना कैडर बदल लिया। अंजलि विश्वकर्मा के पिता अरुण कुमार ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में इंजीनियर थे। उनकी मां नीलम विश्वकर्मा गृहिणी हैं। अंजलि की एक छोटी बहन भी है।



















