नवा रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी एक हालिया आदेश ने मंत्रालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सुशासन के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-8) की स्थापना शाखा में लंबे समय से पदस्थ उप सचिव, श्रीमती अंशिका ऋषि पाण्डेय के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ प्रस्तुत किए गए ज्ञापनों को दरकिनार करते हुए, विभाग ने इस पूरे प्रकरण को नस्तीबद्ध (बंद) कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने दिनांक 23.06.2026 और स्मरण-पत्र दिनांक 22.07.2026 के माध्यम से मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। संघ का आरोप था कि श्रीमती अंशिका पाण्डेय पिछले 5 वर्षों से भी अधिक समय से एक ही संवेदनशील सीट पर जमी हुई हैं, जो कि सामान्य प्रशासन विभाग के ही स्थानांतरण नियमों (3 वर्ष की अधिकतम अवधि) का खुला उल्लंघन है।
संघ ने अपने ज्ञापनों में बेहद गंभीर और प्रामाणिक आरोप लगाए थे, जिनमें शामिल थे:
मनमर्जी और स्वेच्छाचारिता: मंत्रालयीन संवर्ग के अनुभवी अधिकारियों को लूप लाइन में डालना और राज्य प्रशासनिक सेवा के अपने ही बैच के अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी व अतिरिक्त प्रभार सौंपना।
भर्ती नियमों से छेड़छाड़: मंत्रालय के स्थापित भर्ती नियमों (Recruitment Rules) को कमजोर करना।
बैक-डोर एंट्री की योजना: आउटसोर्सिंग के माध्यम से बाहरी तत्वों को प्रवेश दिलाने की कथित योजना, जिससे मंत्रालय की गोपनीयता और सुरक्षा को खतरा है।
द्वेषपूर्वक कार्यप्रणाली: मंत्रालयीन कर्मचारियों की पदोन्नति, पेंशन, अवकाश और अन्य न्यायसंगत मामलों की फाइलों पर अनावश्यक रूप से नकारात्मक टीप अंकित करना। बिना साक्ष्य लिए आनन-फानन में बंद किया गया मामला
कर्मचारी संघ का दावा है कि उनके पास इन सभी आरोपों के संबंध में अत्यंत पुख्ता और प्रामाणिक साक्ष्य मौजूद थे, जिन्हें प्रस्तुत करने के लिए वे तैयार थे। परंतु, राज्य में लागू सुशासन व्यवस्था को दरकिनार करते हुए, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-4) द्वारा संघ से इन साक्ष्यों को लिए बिना ही मामले को रफा-दफा कर दिया गया।सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिनांक 06-08-2026 को जारी पत्र (F.No.ESTB-1024/1098/2026-GAD-4) के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री जी के समन्वय में अनुमोदनोपरांत इस प्रकरण का निस्तारण करते हुए इसे पूर्ण विचारोपरांत नस्तीबद्ध कर दिया गया है।सुशासन व्यवस्था पर कड़ा प्रश्नचिह्नसंघ के कड़े विरोध, आंदोलन की दी गई चेतावनियों और नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के साक्ष्य होने के बाद भी सरकार द्वारा की गई इस एकतरफा कार्रवाई से मंत्रालयीन कर्मचारियों के मध्य भारी असंतोष और निराशा का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात करने वाली शासन व्यवस्था में इस प्रकार से शिकायत को दबाना सुशासन की दावों की पोल खोलता है।अब देखना यह होगा कि इस एकतरफा फैसले के बाद छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ का अगला कदम क्या होता है, क्योंकि संघ ने पूर्व में ही मांगें न माने जाने पर वैधानिक माध्यमों से आंदोलनात्मक कार्यक्रम संचालित करने की चेतावनी दी थी।



















