पुणे के चर्चित गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने हैरानी जताई है। हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मिठाई की दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति दी है। साथ ही एफडीए को दुकान के मालिकों को एक महीने के भीतर 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। हालांकि, आईएएस तुकाराम मुंडे ने कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विभाग इस मामले में अपनी कार्रवाई को सही मानता है और लिखित आदेश मिलने के बाद कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।
‘कोर्ट का आदेश हमारे लिए चौंकाने वाला’
गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स मामले में एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश उनके लिए आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि अभी अदालत का लिखित आदेश नहीं मिला है। इसके मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। तुकाराम मुंडे ने कहा कि यह मामला खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning) से जुड़ा था। मिठाई खाने वाले कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था और जांच रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ को ‘असुरक्षित’ बताया गया था। ऐसे में एफडीए की ओर से की गई कार्रवाई सही थी और इसमें कुछ भी गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि एफडीए अपनी कार्रवाई पर कायम है।
क्या है पूरा मामला?
पुणे स्थित गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स के खिलाफ 12 जून को खाद्य विषाक्तता की शिकायत सामने आने के बाद एफडीए अधिकारियों ने दुकान का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दुकान की साफ-सफाई और कर्मचारियों की स्वच्छता को लेकर गंभीर खामियां पाई गई थीं। इसके बाद उसी दिन एफडीए ने दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। दुकान के संचालक ने इस कार्रवाई के खिलाफ एफडीए आयुक्त के समक्ष अपील की और विभाग को अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपी।
दोबारा जांच में 98 फीसदी अनुपालन
मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब 13 जुलाई को दुकान का दोबारा निरीक्षण किया गया। इस बार दुकान में 98 प्रतिशत अनुपालन पाया गया। इसके बावजूद एफडीए ने दुकान का लाइसेंस बहाल नहीं किया। दुकान मालिकों ने इसके बाद एफडीए के समक्ष आवेदन देकर लाइसेंस का निलंबन रद्द करने की मांग की। लेकिन इस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दुकान मालिकों का दावा था कि एफडीए की कार्रवाई के कारण उन्हें करीब 8.74 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
हाई कोर्ट ने FDA के एक्शन पर उठाए सवाल
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एफडीए का निरीक्षण करना सराहनीय है, लेकिन विभाग को जरूरत से ज्यादा सख्ती नहीं करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि जब दोबारा निरीक्षण में 98 प्रतिशत अनुपालन सामने आ गया था, तब एफडीए को लाइसेंस का निलंबन तुरंत रद्द कर देना चाहिए था।
पीठ ने भोजनालयों और होटलों के लाइसेंस निलंबित करने की एफडीए की नीति को भी ‘अजीब और विकृत’ बताया। अदालत ने दुकान को दोबारा कारोबार शुरू करने की अनुमति देते हुए एफडीए को एक महीने के भीतर दुकान मालिकों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। उधर, हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब एफडीए ने भी कानूनी विकल्प अपनाने के संकेत दिए हैं। आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा है कि अदालत का लिखित आदेश मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



















