2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा, भाजपा और कांग्रेस महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं। बुधवार को अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा ने सत्ता में आने पर ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत सालाना 40,000 रुपए देने का वादा किया। उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा पास करने वाली लड़कियों के लिए लैपटॉप और महिलाओं के लिए एक अलग एम्बुलैंस सेवा का भी वादा किया। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की शुरुआत की और मेधावी स्नातक लड़कियों के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के क्रियान्वयन को दोहराया। भाजपा एक अलग दृष्टिकोण अपना रही है। उसका प्रयास सरकार द्वारा पहले से दी गई कल्याणकारी योजनाओं और उनके आसपास बने भरोसे पर आधारित है। 

पार्टी दांव लगा रही है कि जिन महिलाओं को पहले ही लाभ मिल चुका है, वे फिर से उसका समर्थन करने की अधिक संभावना रखेंगी। योगी का सबसे बड़ा सेलिंग प्वाइंट सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून और व्यवस्था को संभालना है। स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में वापसी को भी उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं के साथ भाजपा के भाषण कौशल और जमीनी जुड़ाव को सशक्त बनाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी अधिक से अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की कोशिश करेगी। इस बीच, भाजपा के लिए 2022 में महिलाओं के बीच बनाई गई बढ़त को बनाए रखना योगी के रिकॉर्ड का बचाव करने के लिए महत्वपूर्ण है। सपा के लिए, एक दशक तक विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में लौटने के अपने प्रयास के लिए इन मतदाताओं के बीच सेंध लगाना आवश्यक है।

खरगे ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया और लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग की। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किए जाने की भी उम्मीद कर रही है। इस मुद्दे पर 45 दिनों से कम समय में खरगे का यह दूसरा पत्र तब आया जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को दावा किया कि एक विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, जिससे कांग्रेस अध्यक्ष को आश्चर्य हुआ कि क्या यह मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही लगातार देरी का कारण था। मार्च-अप्रैल में पत्रों की एक शृंखला के बाद, खरगे ने 16 जुलाई को मोदी के सामने इस मांग को दोहराया था।

उमर पर मंत्रिपरिषद के विस्तार का दबाव : सत्तारूढ़ नैशनल कॉन्फ्रैंस (एन.सी.) मंत्रिपरिषद के प्रस्तावित विस्तार से पहले उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार में शामिल होने के लिए कांग्रेस के पास एक नए प्रस्ताव के साथ पहुंची है। लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जे.के.पी.सी.सी.) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने राज्य का दर्जा बहाल होने तक उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में शामिल होने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया है। कांग्रेस एन.सी. सरकार का समर्थन करती है लेकिन मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं है। एक केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते, जम्मू और कश्मीर में अपने मंत्रिपरिषद के आकार पर एक वैधानिक सीमा है। हालांकि, मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित 9 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले अब 6 मंत्री शामिल हैं। उमर को अपने मंत्रिमंडल की संख्या बढ़ाने के लिए अपनी ही पार्टी के भीतर से अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

खरगे के रैली स्थल के शुद्धिकरण का मामला : केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के स्थल के शुद्धिकरण की निंदा करने के बाद, उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान के शुद्धिकरण को सही ठहराया और कहा कि यह स्थल नारों से दूषित हो गया था। जबकि कांग्रेस मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि नड्डा ने भले ही इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया हो लेकिन सच्चाई यह है कि आर.एस.एस.-भाजपा की रगों में भेदभाव खून की तरह बहता है। 

खेड़ा ने कहा, ‘‘अब जब इसके अपने प्रदेश अध्यक्ष ने खुले तौर पर छुआछूत का बचाव किया है, तो क्या पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी? क्या मोदी उन्हें हटाएंगे? यदि नहीं, तो मोदी की एकता और दलितों के सम्मान की भव्य अपीलें एक राजनीतिक नाटक के अलावा और कुछ नहीं हैं।’’ हालांकि, खरगे ने राज्यसभा में इस मामले को उठाया था और मांग की थी कि जिन लोगों ने उनकी रैली के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में ‘शुद्धिकरण’ किया था, उन पर अस्पृश्यता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इस बीच, राज्यसभा में सदन के नेता नड्डा ने भाजपा को इस समारोह से अलग कर लिया था और कहा था कि पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।-राहिल नोरा चोपड़ा

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