दिल्ली के एक होटल में कथित छेड़छाड़ की घटना को लेकर बिहार में सियासत गरमाई हुई है। बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री और महुआ से लोजपा (रामविलास) के विधायक संजय कुमार सिंह द्वारा भेजे गए 50 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने पलटवार किया है। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेज प्रताप ने कहा कि ऐसे नोटिस का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न सच दबेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के आचरण और कारनामों के बारे में हर कोई जानता है, इसलिए नोटिस भेजकर कानूनी दबाव बनाने की कोशिश पूरी तरह बेकार साबित होंगी।

नोटिस से कोई फर्क नहीं पड़ता – तेज प्रताप

मानहानि के नोटिस को लेकर पूछे गए सवाल पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि नोटिस भेजा गया है तो भेजा गया है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा कि मंत्री संजय सिंह के इन नोटिसों से क्या सच्चाई छिप जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरा बिहार जानता है कि मंत्री कहां और किस हाल में रहते हैं। तेज प्रताप ने कहा कि जब जनता सड़क पर उतरेगी और उन्हें घेरेगी, तब जाकर उन्हें अपनी असलियत का अहसास होगा। तेज प्रताप ने यह भी कहा कि वे किसी भी तरह की कानूनी धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं और मामले से जुड़े सभी पहलुओं को लगातार सामने लाते रहेंगे।

तेज प्रताप ने लगाए थे आरोप

यह विवाद तब शुरू हुआ जब तेज प्रताप यादव ने मंत्री संजय सिंह पर कई आरोप लगाए। तेज प्रताप का दावा था कि महुआ से विधायक और मंत्री संजय सिंह ने दिल्ली के एक बड़े होटल में शराब के नशे में एक महिला कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी करने की कोशिश की थी।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि होटल स्टाफ के बीच-बचाव के बाद बात बिगड़ने लगी, जिसके बाद मामले को पुलिस और मीडिया से छुपाने के लिए करीब 25 लाख रुपये का लेन-देन कर पूरे मामले को रफा दफा किया गया। तेज प्रताप ने दावा किया था कि उनके पास इस घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने की जानकारी है।

संजय सिंह ने भेजा 50 करोड़ का कानूनी नोटिस

इन आरोपों के सामने आने के बाद मंत्री संजय सिंह ने तेज प्रताप यादव के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाते हुए अपने अधिवक्ता के जरिए 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा। नोटिस में तेज प्रताप के आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए कहा गया कि यह राजनीतिक द्वेष के कारण उनकी छवि खराब करने की एक सोची-समझी साजिश थी।

नोटिस में मांग की गई कि तेज प्रताप यादव मानहानि वाली सभी सोशल मीडिया पोस्ट हटा दें, बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और सात दिनों के भीतर मानहानि के लिए 50 करोड़ रुपये का हर्जाना दें। इसमें साफ चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ उचित अदालत में दीवानी और आपराधिक मुकदमे दायर किए जाएंगे।

चिराग ने जांच का संकेत दिया

वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले का संज्ञान लिया है। चिराग ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। अगर निष्पक्ष जांच में वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें मंत्री पद से हटा दिया जाएगा, पार्टी से निकाल दिया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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