भुवनेश्वर : ओडिशा के बालासोर जिले के एक जंगल से पांच ओरंगुटानों को बचाया गया। गांव के पास अचानक इनके दिखने से वहां के लोग और वन अधिकारी हैरान रह गए। ये जानवर इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं और भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते हैं। ये ओरंगुटान भोगराई ब्लॉक के बडापाही गांव के पास बिचित्रपुर वन क्षेत्र में देखे गए। जिन ग्रामीणों ने सबसे पहले इन्हें देखा, उन्हें समझ नहीं आया कि वे कौन से जानवर देख रहे हैं और उन्होंने इलाके के दूसरे लोगों को इसकी जानकारी दी।
गांववालों ने पहली बार देखे ऐसे जानवर तो हुई हैरानी
यह अनोखी घटना जल्द ही गांव में चर्चा का विषय बन गई। जैसे-जैसे और लोग जंगल के पास पहुंचे, कई निवासियों ने अपने मोबाइल फोन पर ओरंगुटानों की तस्वीरें लीं और वीडियो रिकॉर्ड किए। इसके बाद यह फुटेज स्थानीय स्तर पर फैलने लगा। जानवरों के बारे में जानकारी मिलने के बाद वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। उदयपुर वन रेंजर संजय मोहंती के नेतृत्व में एक बचाव दल ने सभी पांच ओरंगुटानों को सुरक्षित पकड़ने का काम शुरू किया।
यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ और जानवरों को उदयपुर वन कार्यालय ले जाया गया। अधिकारी अब आगे के कदम तय करने से पहले उनके स्वास्थ्य की जांच करेंगे।
नन्हें ओरंगुटान ओडिशा कैसे पहुंचे?
इन पांच जानवरों के मिलने से वन्यजीव अधिकारियों के मन में सवाल उठ रहे हैं क्योंकि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं। उनका प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया तक ही सीमित है, इसलिए ओडिशा के तटीय जंगल में उनका दिखना काफी असामान्य है। अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये जानवर कहां से आए और बालासोर कैसे पहुंचे। बालासोर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (वन्यजीव) प्रतीक प्रकाश इंदलकर ने कहा कि जानवरों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की जाएगी।
जानवरों को नंदनकानन ले जाने की संभावना
वन विभाग बचाए गए ओरंगुटानों को भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान (ज़ूलॉजिकल पार्क) में ले जाने की तैयारी भी कर रहा है। जानवरों की मेडिकल जांच पूरी होने और ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही उन्हें दूसरी जगह भेजा जाएगा। अधिकारी इन पांचों जानवरों को दूसरी जगह भेजने से पहले उनकी हालत की जांच करेंगे।
ये ओरांगुटान भोगराई ब्लॉक के बडापली गांव के पास, रानाकाथा नाम के PRF के नजदीक मिले। वे छोटे थे और ज्यादा हिल-डुल नहीं रहे थे, लेकिन सक्रिय थे और उन्हें खाना दिया गया। उन्हें रेस्क्यू करके सेक्शन ऑफिस लाया गया। सभी पांच ओरांगुटान में दो मादा और तीन नर हैं। उनकी उम्र एक साल से कम है। उन्हें उदयपुर सेक्शन ऑफिस ले जाया गया है। जांच, कॉम्बिंग ऑपरेशन और CCTV फुटेज की समीक्षा चल रही है, साथ ही पुलिस, WCCF और STF एजेंसियों के साथ तालमेल भी बिठाया जा रहा है।
इंदरकर प्रतीक प्रकाश, फॉरेस्ट ऑफिसर
विदेशी प्राणी, अनसुलझे सवाल
फिलहाल, सबसे बड़ा रहस्य अभी भी अनसुलझा है कि पांच ओरांगुटान- एक ऐसी प्रजाति जो भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जाती, बालासोर के जंगल में कैसे पहुंच गए? ये वानर प्रजातियां इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों (रेनफॉरेस्ट) की मूल निवासी हैं। इन्हें एशियाई उपमहाद्वीप के कुछ अन्य हिस्सों में भी देखा गया है। भारत में ये प्रजातियां बहुत कम पाई जाती हैं।
25 लाख रुपये तक कीमत है एक ओरंगुटान बंदर की
वन अधिकारियों ने बताया कि बंदर की यह प्रजाति ओडिशा में नहीं पाई जाती हैं, लेकिन यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि राज्य में ऐसी अनोखी वन्यजीव प्रजातियां देखी गई हैं। हो सकता है कि वे भोजन की तलाश में यहां आए हों, या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल हो सकता है। जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत लगभग 20 लाख से 25 लाख रुपए है।
उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग की टीम इन अनोखे जानवरों को एक तय जगह पर लाएगी, जहां उन्हें क्वारंटाइन में रखा जाएगा और जरूरी इलाज दिया जाएगा। बाद में उन्हें भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर में रखा जाएगा। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) को भी इस बरामदगी के बारे में सूचित कर दिया गया है। एजेंसी के भी इस मामले की जांच शुरू करने की संभावना है।



















