रूस ने भारत के साथ रक्षा साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर ली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान मॉस्को ने लड़ाकू विमानों से लेकर मिसाइल डिफेंस तक कई बड़े प्रस्ताव सामने रखे हैं। इनमें Su-57 स्टील्थ फाइटर का भारत में संयुक्त उत्पादन और करीब 260 Su-30MKI विमानों को अत्याधुनिक ‘सुपर सुखोई’ में बदलने की योजना सबसे अहम मानी जा रही है। भारत की घटती फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता के बीच इन प्रस्तावों का रणनीतिक महत्व बढ़ गया है।

Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का संयुक्त उत्पादन

रक्षा प्रस्तावों में सबसे अधिक चर्चा Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की है। रूस भारत के साथ इसके संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। भारत के लिए यह विकल्प इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) परियोजना को अभी समय लगेगा। इसके प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2029-30 के आसपास होने की संभावना बताई जा रही है। ऐसे में तत्काल भविष्य में अत्याधुनिक स्टील्थ क्षमता हासिल करने की जरूरत के बीच Su-57 पर नई चर्चा शुरू हुई है।

भारत पहले ही अमेरिकी F-35 को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर चुका है। ऐसे माहौल में रूस तकनीक हस्तांतरण, मिसाइल पैकेज और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी शर्तों के साथ Su-57 को आकर्षक बनाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, अंतिम सौदा भारत की परिचालन जरूरतों, लागत और तकनीकी हस्तांतरण की शर्तों पर निर्भर करेगा।

‘सुपर सुखोई’ कार्यक्रम: Su-30MKI बेड़े का आधुनिकीकरण

दूसरा बड़ा प्रस्ताव Su-30MKI बेड़े के आधुनिकीकरण का है। भारत के पास करीब 260 ऐसे विमान हैं। शुरुआती चरण में 84 विमानों को अपग्रेड करने की योजना पर चर्चा हो रही है। करीब 11 अरब डॉलर के ‘सुपर सुखोई’ कार्यक्रम में AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और नए इंजन जैसे बदलाव शामिल किए जा सकते हैं। इससे मौजूदा लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता और सेवा-आयु दोनों बढ़ सकती हैं।

मिसाइल डिफेंस और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों की पेशकश

मिसाइल डिफेंस के मोर्चे पर भी रूस ने विकल्पों की सूची लंबी कर दी है। S-400 की अतिरिक्त इकाइयों के साथ रूस भारत में इसके रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल यानी MRO सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दे रहा है। इसके अलावा S-500, Pantsir-S1M, आधुनिक रडार और रणनीतिक पनडुब्बियों पर भी बातचीत संभावित है। S-500 की घोषित क्षमता S-400 से आगे बताई जाती है और इसकी मिसाइल-रोधी भूमिका इसे खास बनाती है।

इसके साथ करीब 300 R-37M लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की संभावित खरीद भी भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई मारक क्षमता को मजबूत कर सकती है। कुल मिलाकर, पुतिन की यात्रा के दौरान सामने आया रूसी पैकेज केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन, तकनीक और रखरखाव में साझेदारी बढ़ाने की दिशा में भी संकेत देता है।

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