भारत की राजधानी नई दिल्ली  स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितम्बर, 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन  का आयोजन हो रहा है। इस सम्मेलन का आधिकारिक थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखा गया है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित सभी सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। 

ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली अंतर्राष्ट्रीय समूह है। साल 2001 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जिम ओश्नील ने BRIC (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन) के रूप में इसकी स्थापना की थी। औपचारिक रूप से यह समूह 2006 में गठित हुआ और 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुडऩे के बाद इसका नाम BRICS पड़ा। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, तकनीकी विकास और निवेश को बढ़ावा देना है। इस वर्ष भारत ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण अवसर है। राजधानी दिल्ली में 13 सितम्बर तक चलने वाले इस सम्मेलन में भारत, रूस, चीन समेत कुल 11 सदस्य देशों की गण्यमान्य हस्तियां हिस्सा लेंगी और संगठन की आगे की दिशा तय करेंगी।

भारत के ब्रिक्स के साथ आर्थिक-व्यापारिक संबंध कैसे हैं, इसका आॢथक विश्लेषण करें। एक आॢथक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष 2026 की पहली छमाही में ब्रिक्स देशों का व्यापार सुधार की राह पर लौटा है। 11 देशों का कुल वस्तु व्यापार करीब 5.8 लाख करोड़ डॉलर रहा। इसमें निर्यात की हिस्सेदारी 3.2 लाख करोड़ डॉलर की, जबकि आयात का हिस्सा 2.6 लाख डॉलर का है। भारत के लिए ब्रिक्स बाजार कम, सप्लायर ज्यादा रहा है। इस पर काम किए जाने की जरूरत रहेगी। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि 6 महीनों में भारत ने अपने कुल माल निर्यात में करीब 20 प्रतिशत ही बाकी 10 ब्रिक्स देशों को भेजा, जबकि उनसे अपने कुल आयात का 43 प्रतिशत माल अपने यहां मंगवाया। यानी, ब्रिक्स भारत के लिए निर्यात बाजार से कहीं बड़ा आयात का स्रोत बन चुका है। 

भारत का ब्रिक्स से आयात 13.5 प्रतिशत बढ़कर 178 अरब डॉलर, जबकि निर्यात सिर्फ 4.6 प्रतिशत बढ़कर 48 अरब डॉलर रहा। नतीजा, व्यापार घाटा 17.2 प्रतिशत बढ़कर करीब 130 अरब डॉलर का हो गया। अगर पूरे ब्रिक्स समूह की बात करें तो इन्हीं 6 महीनों में ब्रिक्स के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 66 प्रतिशत और आयात की 59 प्रतिशत हो गई। इसके मुकाबले भारत की हिस्सेदारी निर्यात में करीब 8 प्रतिशत जबकि आयात में 16 प्रतिशत रही। चीन ने जनवरी से जून के पहले 6 महीनों में अपना सबसे ज्यादा 26 प्रतिशत निर्यात भारत को किया। लेकिन रूस के साथ चीन का व्यापारिक रिश्ता उलटा रहा। चीन ने इन्हीं 6 महीनों में सबसे ज्यादा 28 प्रतिशत आयात रूस से किया।

ब्रिक्स देशों का व्यापार फिर बढ़ रहा है लेकिन भारत के लिए चुनौती सिर्फ ज्यादा व्यापार की नहीं, व्यापार के ढांचे में संतुलन की है। समूह के भीतर चीन का बढ़ता प्रभुत्व और भारत का  व्यापार घाटा (निर्यात कम और आयात ज्यादा) बताता है कि हमारे लिए ब्रिक्स की अगली प्राथमिकता बाजार पहुंच ही नहीं, उससे भी ज्यादा व्यापार संतुलन की होगी। कुल मिला कर देश के लिए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन देश के लिए गर्व के साथ एक अवसर भी है, क्योंकि इससे हमें अपनी अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक पकड़ मजबूत करने के अनेक मौके मिल रहे हैं।-डा. वरिन्द्र भाटिया

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